भारत का फूड सर्विसेज सेक्टर 2026 में **$90 बिलियन** से बढ़कर 2031 तक **$150 बिलियन** (लगभग ₹12 लाख करोड़) तक पहुंचने वाला है। इसकी मुख्य वजह ऑर्गेनाइज्ड ब्रांड्स की बढ़ती मांग और डिजिटल ऑर्डरिंग का चलन है।
ऑर्गेनाइज्ड प्लेयर्स का बढ़ता दबदबा
भारत का फूड सर्विसेज इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। साल 2031 तक इस सेक्टर का कुल मार्केट साइज $150 बिलियन (लगभग ₹12 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2026 में $90 बिलियन था। यह ग्रोथ इस बात का संकेत है कि शहरी और अर्ध-शहरी भारतीय उपभोक्ता अब खाने-पीने और सुविधा को कितनी अहमियत दे रहे हैं।
ऑर्गेनाइज्ड फूड सर्विस ब्रांड्स की मांग तेजी से बढ़ी है। ये कंपनियां अब मार्केट का लगभग 45-50% हिस्सा रखती हैं। लोकल ढाबों के विपरीत, ऑर्गेनाइज्ड ब्रांड्स के पास स्टैंडर्ड प्रक्रियाएं और बेहतर डिजिटल पहुंच है। हालांकि, यह सेक्टर अभी भी काफी बिखरा हुआ है, और बहुत कम कंपनियां ₹500 करोड़ का रेवेन्यू पार कर पाई हैं।
डिजिटल ऑर्डरिंग का बढ़ता क्रेज
डिजिटल एडॉप्शन भी इस ग्रोथ का एक अहम हिस्सा है। ऑनलाइन डिलीवरी सेगमेंट, जिसका 2021 में मार्केट शेयर सिर्फ 4% था, 2031 तक बढ़कर 18% होने की उम्मीद है। बड़े शहरों के डेटा से पता चलता है कि 2021 में जहां 30 करोड़ ऑर्डर आते थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 106 करोड़ तक पहुंच गया। यानी, डिलीवरी की क्षमता अब मुनाफे के लिए जरूरी हो गई है।
स्नैक्स और बेवरेजेज में कमाई के मौके
बाजार के बढ़ने के साथ-साथ कुछ खास कैटेगरी तेजी से उभर रही हैं। स्नैक्स, डेजर्ट्स और बेवरेजेज जैसे शेक, जूस और केक डिलीवरी के लिए परफेक्ट हैं क्योंकि ये आसानी से ट्रांसपोर्ट होते हैं और क्वालिटी बनी रहती है। प्रीमियम चाय और कॉफी का सेगमेंट भी ग्राहकों को पसंद आ रहा है, क्योंकि इनमें बेहतर मार्जिन मिलता है।
हालांकि, निवेशकों को इस सेक्टर में कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स और रेस्टोरेंट चेन के बीच गलाकाट कॉम्पिटिशन, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से मार्जिन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, एक्सपेंशन और डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट से कैपिटल स्पेंडिंग बढ़ सकती है, जिसका असर शॉर्ट-टर्म कैश फ्लो पर पड़ सकता है।
