त्योहारी सीजन में भारतीय परिवारों की जेब पर भारी महंगाई और लोन की EMI का बोझ बढ़ गया है। करीब 84% परिवार बजट दबाव में हैं, जिससे FMCG सेक्टर में डिमांड 2% तक गिर गई है और फेस्टिव सीजन की शुरुआत काफी धीमी रही है।
भारत में इस साल त्योहारी सीजन का उत्साह महंगाई की मार से फीका पड़ गया है। अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो खाने-पीने की चीजों से लेकर कीमती धातुओं तक, हर चीज महंगी होने से आम आदमी का बजट डगमगा गया है। हालांकि ₹50,000 से ज्यादा की प्रीमियम वस्तुओं में थोड़ी मांग है, लेकिन आम जनता और ग्रामीण भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं।\n\n### महंगाई का चौतरफा प्रहार\n\nअगस्त 2026 में रिटेल इन्फ्लेशन 4.82% पर रही, जबकि फूड इन्फ्लेशन 5.95% तक पहुंच गई। ज्वेलरी मार्केट में तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। सोने, हीरे और प्लैटिनम की कीमतों में 35% से ज्यादा का उछाल आया है, जबकि चांदी की कीमतें तो 100% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इस वजह से उपभोक्ता लग्जरी खरीदारी को टाल रहे हैं।\n\nसर्वे के अनुसार, 84% परिवार इस समय आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं, जो पिछले साल 72% था। बढ़ती EMI और जीवन-यापन के महंगे खर्चों ने परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम को सीमित कर दिया है।\n\n### FMCG सेक्टर की चुनौतियां\n\nइसका सीधा असर FMCG कंपनियों पर दिख रहा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कुल सेल्स वॉल्यूम में 2% की गिरावट आई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 5% तक पहुंच गया है। कमजोर मॉनसून और वेतन वृद्धि में सुस्ती ने ग्रामीण क्रय शक्ति (Purchasing Power) को और कमजोर किया है। साथ ही, कॉपर, स्टील और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल की लागत बढ़ने से मैन्युफैक्चरर्स पर मार्जिन बचाने का दबाव है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\n\nबाजार में रिकवरी अब 'मापे हुए' कदमों से हो रही है। निवेशकों को आने वाली तिमाही के नतीजों पर पैनी नजर रखनी होगी। खासतौर पर मैनेजमेंट की कमेंट्री, वॉल्यूम ग्रोथ और रॉ मटेरियल की लागत का मुनाफे पर असर देखना जरूरी है। जो कंपनियां अपनी मार्केट हिस्सेदारी बनाए रखते हुए मुनाफा सुरक्षित रखेंगी, वही इस मुश्किल दौर में बेहतर प्रदर्शन करेंगी।
