त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को बड़ा झटका लगा है। स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स के महंगे होने और डिस्काउंट कम मिलने से डिस्पैच वॉल्यूम में **10-12%** की कमी दर्ज की गई है, जो कमजोर कंज्यूमर सेंटीमेंट को दर्शाता है।
भारत के त्योहारों की चमक इस बार ई-कॉमर्स मार्केट में कुछ फीकी नजर आ रही है। प्रमुख मार्केटप्लेस पर डिस्पैच वॉल्यूम में पिछले साल के मुकाबले 10-12% की गिरावट देखी गई है, जो इंडस्ट्री की उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत है।\n\n### इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन पर मार\nइस गिरावट की सबसे बड़ी वजह इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती कीमतें हैं। प्रीमियम स्मार्टफोन, लैपटॉप और होम अप्लायंसेज के दाम पिछले कुछ महीनों में 30-40% तक बढ़ गए हैं। नतीजतन, स्मार्टफोन की यूनिट सेल्स में साल-दर-साल 16% की कमी आई है। कंपनियों ने भी इस बार डिस्काउंट में 35-40% की कटौती की है, जिससे ग्राहक या तो खरीदारी टाल रहे हैं या फिर महंगे फ्लैगशिप फोन की जगह सस्ते मॉडल्स चुन रहे हैं।\n\n### महंगाई का दबाव और बदलता ट्रेंड\nदेश में खुदरा महंगाई दर 5.54% के करीब पहुंच गई है, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ा है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण लोगों के पास गैजेट्स जैसे नॉन-एसेंशियल खर्चों के लिए पैसा कम बचा है। हालांकि, ट्रेडिशनल ई-कॉमर्स जहां संघर्ष कर रहा है, वहीं 'क्विक कॉमर्स' प्लेटफॉर्म्स 5 से 6 गुना की ग्रोथ के साथ ब्यूटी और पर्सनल केयर जैसे सेगमेंट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\nनिवेशकों की नजर अब कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी है। क्या ब्रांड्स कम वॉल्यूम के बावजूद मार्जिन बचा पाएंगे? आने वाले हफ्तों में दशहरा और दिवाली के बीच का लंबा अंतर मांग में कोई सेकेंडरी वेव लाएगा या नहीं, यह देखना अहम होगा। फिलहाल, मार्केट इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या यह सुस्ती केवल एक छोटा सा दौर है या कंज्यूमर स्पेंडिंग में कोई बड़ा बदलाव।
