भारत में इस साल फेस्टिव सीजन की शुरुआत थोड़ी फीकी रही है। 7 से 10 अक्टूबर के बीच ऑनलाइन सेल में **10%** की कमी दर्ज की गई है, जिसका कुल आंकड़ा लगभग **₹30,000 करोड़** रहा। स्मार्टफोन की घटती मांग और टैक्स इंसेंटिव्स की कमी इसका मुख्य कारण है, जिसके चलते अब ई-कॉमर्स कंपनियां फैशन और क्विक कॉमर्स पर अपना जोर बढ़ा रही हैं।
फेस्टिव सीजन 2026 के पहले चार दिनों (7 अक्टूबर से 10 अक्टूबर) में ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) ₹29,800 करोड़ से ₹30,900 करोड़ के बीच रही है। यह पिछले साल के मुकाबले 7% से 10% कम है। यह गिरावट यह संकेत दे रही है कि अब आसानी से मिलने वाली टैक्स-बेस्ड कंजम्पशन का दौर खत्म हो रहा है।
स्मार्टफोन सेगमेंट पर भारी दबाव
फेस्टिव सेल का इंजन माने जाने वाले स्मार्टफोन सेगमेंट में इस बार सुस्ती साफ दिख रही है। कुल सेल में मोबाइल फोन का हिस्सा जो पिछले साल 35% था, इस बार घटकर 30% पर आ सकता है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं—पहला, इस बार GST से जुड़ी भारी छूट का न होना और दूसरा, DRAM और NAND जैसे कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों के कारण फोन्स का महंगा होना। इसके अलावा, नए स्मार्टफोन्स में बड़े बदलाव न होने से ग्राहक अब पुराने फोन ही लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्विक कॉमर्स और फैशन की ओर बढ़ता झुकाव
महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स की जगह अब फैशन, ब्यूटी और घरेलू सामानों की मांग बढ़ रही है। क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से उभर रहा है और इस साल यह फेस्टिव सेल में 16% हिस्सेदारी हासिल कर सकता है, जो पिछले साल 12% थी। Amazon, Meesho और Myntra जैसे प्लेटफॉर्म्स अब अपनी रणनीति बदल रहे हैं, क्योंकि ग्राहक अब बड़ी खरीदारी के बजाय छोटे और बार-बार होने वाले खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स और स्टेकहोल्डर्स के लिए अब असली चुनौती इलेक्ट्रॉनिक्स पर भारी डिस्काउंट दिए बिना सेल्स बरकरार रखना है। 8 नवंबर को होने वाली दिवाली तक अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए अपनी स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव करती हैं।
