फेस्टिव सीजन में कंज्यूमर डिमांड काफी मजबूत है और ड्यूरेबल गुड्स की बिक्री में दहाई अंकों (double-digit) की ग्रोथ दिख रही है। हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती लागत के चलते कंपनियां आज से ही अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में **5% से 8%** तक का इजाफा कर रही हैं।
डिमांड का जोर और कीमतों का झटका
जुलाई-सितंबर तिमाही के डेटा पर नजर डालें तो अप्लायंसेज की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। एयर कंडीशनर की सेल्स में 25%, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन की बिक्री में 13% से 14% तक की ग्रोथ दर्ज की गई है। बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी रिटेलर्स को भारी भीड़ देखने को मिल रही है। हालांकि, कॉपर, स्टील और फ्रेट (freight) की बढ़ती कीमतों ने मैन्युफैक्चरर्स की कमर तोड़ दी है, जिसके चलते आज, 1 अक्टूबर 2026 से कीमतों में 5-8% की बढ़ोतरी लागू हो गई है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह महंगी कीमतें फेस्टिव डिमांड को कम करती हैं या नहीं।
ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स का जलवा
इस फेस्टिव सीजन में कुल सेल्स का आंकड़ा ₹1.50 लाख करोड़ से ₹1.55 लाख करोड़ के बीच रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 25-29% ज्यादा है। इस बार क्विक कॉमर्स का मार्केट शेयर 16% यानी करीब ₹24,000 करोड़ तक रहने की उम्मीद है, जो पारंपरिक रिटेल मॉडल को कड़ी टक्कर दे रहा है।
RBI की पॉलिसी और महंगाई का डर
मैक्रो-इकनॉमिक मोर्चे पर कच्चा तेल और कमजोर मानसून चिंता का विषय बने हुए हैं। बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने के लिए Reserve Bank of India (RBI) अक्टूबर और दिसंबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कर्ज लेना महंगा हो जाएगा, जिससे अप्लायंसेज जैसे बड़े खर्चों पर बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों को कंपनी के आने वाले नतीजों का इंतजार करना चाहिए ताकि पता चल सके कि क्या ये कंपनियां बढ़े हुए खर्चों के बीच अपने मुनाफे (Profit Margins) को सुरक्षित रख पाती हैं या नहीं।
