ज्वेलरी इम्पोर्ट के नियम बदले: भारत सरकार का बड़ा फैसला, खरीदारों की बल्ले-बल्ले!

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AuthorNeha Patil|Published at:
ज्वेलरी इम्पोर्ट के नियम बदले: भारत सरकार का बड़ा फैसला, खरीदारों की बल्ले-बल्ले!
Overview

भारत में ज्वेलरी इम्पोर्ट को लेकर बड़ा नियम बदल गया है। नए बैगेज रूल्स 2026 के तहत, अब सोने-चांदी के गहनों पर वैल्यू लिमिट (money cap) खत्म कर दी गई है। इसके बजाय, यात्रियों को वजन के आधार पर ड्यूटी-फ्री गहने लाने की इजाजत मिलेगी। महिलाओं के लिए **40 ग्राम** और अन्य यात्रियों के लिए **20 ग्राम** तक के गहने बिना किसी वैल्यू कैप के लाए जा सकते हैं। इस कदम से ग्राहकों का कॉन्फिडेंस (consumer confidence) बढ़ेगा और वे दुनिया भर से आसानी से ज्वेलरी खरीद पाएंगे।

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ज्वेलरी इम्पोर्ट पर बड़ा नियम बदलाव: अब कीमत नहीं, वजन देखेगी सरकार!

भारत सरकार ने यात्रियों के लिए ज्वेलरी (jewellery) इम्पोर्ट करने के नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। 2 फरवरी 2026 से लागू हुए नए बैगेज रूल्स 2026 के तहत, अब बाहर से ज्वेलरी लाने वाले यात्रियों को कीमत की कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी। पहले जहां गहनों की कीमत के आधार पर कस्टम (customs) ड्यूटी लगती थी और वैल्यू कैप (value cap) को लेकर अक्सर विवाद होते थे, वहीं अब इस पूरी व्यवस्था को बदलकर वजन पर फोकस किया गया है। नई व्यवस्था के तहत, महिलाएं 40 ग्राम और अन्य यात्री 20 ग्राम तक के गहने ड्यूटी-फ्री ला सकते हैं।

कीमत की झंझट खत्म, क्यों हुआ ये बदलाव?

पिछले एक दशक में सोने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते, पुराने वैल्यू कैप अब यात्रियों के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं रह गए थे। इससे कस्टम पर गहनों के सही मूल्यांकन को लेकर खूब उलझन और विवाद खड़े होते थे। नए नियम इस जटिल प्रक्रिया को बेहद आसान बना देंगे और यात्रियों को बिना किसी डर के अपनी पसंद के गहने खरीदने की सुविधा देंगे। आपको बता दें कि 2026 की शुरुआत में ही ग्लोबल रिस्क (global risk) के चलते भारत में सोने की कीमतें ₹94,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी थीं। ऐसे में, यह नियम बदलाव और भी ज्यादा अहम हो जाता है।

ग्लोबल खरीदारों को बड़ा बूस्ट, मार्केट पर क्या होगा असर?

भारतीय ज्वेलरी मार्केट, जिसका आकार अभी लगभग 85-90 बिलियन डॉलर है और जो 2030 तक 130 बिलियन डॉलर से ऊपर जाने का अनुमान है, में यह नया नियम एक बड़ा बूस्ट देगा। अब ग्राहक दुबई, सिंगापुर या यूरोप जैसे देशों से ज्वेलरी खरीदते समय मनमानी कीमत की चिंता नहीं करेंगे, बल्कि क्वालिटी और डिजाइन पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। एक सर्वे के अनुसार, लगभग चौथाई भारतीय ग्राहक अपनी ज्वेलरी की तलाश ऑनलाइन शुरू करते हैं, जिससे पता चलता है कि वे सोच-समझकर और रिसर्च करके खरीदारी करना पसंद करते हैं। इसके साथ ही, हल्के सोने के गहने, डेमी-फाइन ज्वेलरी और लैब-ग्रोन डायमंड (lab-grown diamonds) की बढ़ती लोकप्रियता को भी यह नियम सपोर्ट करेगा। फिलहाल, ये आइटम्स शहरी भारत में डायमंड ज्वेलरी की बिक्री का 8-10% तक हिस्सा बन चुके हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय तुलना: भारत के नियम कितने बेहतर?

अगर अंतरराष्ट्रीय नियमों से तुलना करें, तो भारत के नए नियम काफी सरल हैं। उदाहरण के लिए, UAE यात्रियों को 10 किलोग्राम सोना एक्सपोर्ट करने की अनुमति देता है, लेकिन यह नियम रिसीविंग देश पर निर्भर करता है। वहीं, यूरोप में ज्वेलरी इम्पोर्ट पर 0% से 4% तक ड्यूटी लग सकती है, जबकि सिंगापुर 9% GST वसूलता है। भारत के नए नियम, जो केवल वजन पर आधारित हैं, इन सब की तुलना में काफी पारदर्शी और आसान माने जा रहे हैं।

चुनौतियां भी कम नहीं: गोल्ड प्राइसेज और डिमांड का गणित

हालांकि, इस सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव (volatility) ज्वैलर्स के लिए रॉ मटेरियल (raw material) की लागत को बढ़ाता है और साथ ही आम ग्राहकों के लिए खरीदारी मुश्किल भी बना देता है। 2026 के लिए भारत में सोने की कुल मांग में गिरावट का अनुमान है। विशेष रूप से, ज्वेलरी की मांग 24% घटकर 430.5 टन तक जा सकती है, जबकि इन्वेस्टमेंट डिमांड (investment demand) बढ़ सकती है। इसके अलावा, असंगठित क्षेत्र (unorganized sector) से कड़ी प्रतिस्पर्धा और लग्जरी सामानों पर 12.5% तक की इंपोर्ट ड्यूटी भी मार्केट पर अपना असर डाल सकती है।

भविष्य की राह: ग्राहक-केंद्रित नीतियां और बदलती पसंद

कुल मिलाकर, नए बैगेज रूल्स 2026 को सरकार की ओर से एक बड़ा ग्राहक-केंद्रित कदम माना जा रहा है। यह भारत के ज्वेलरी मार्केट के विकास को गति देगा, खासकर लैब-ग्रोन डायमंड्स और हल्के, मॉडर्न डिजाइनों की तरफ बढ़ते रुझान के साथ। नियमों को आसान बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर ग्राहकों का विश्वास और बढ़ाएगा, और मार्केट में ऑर्गेनाइज्ड रिटेल (organized retail) की हिस्सेदारी को भी मजबूत करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.