भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर जबरदस्त रफ्तार पकड़ने वाला है। साल 2024 के **$125 बिलियन** से बढ़कर यह मार्केट 2030 तक **$345 बिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें क्विक कॉमर्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मुख्य भूमिका होगी।
भारत के ऑनलाइन रिटेल इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। Infisum की नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट $345 बिलियन के स्तर को छू लेगा। यह ग्रोथ 18.4% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से होने की उम्मीद है। इस बदलाव के पीछे ग्राहकों की बदली आदतें और रिटेल में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल है।
क्विक कॉमर्स का दबदबा
क्विक कॉमर्स अब सिर्फ एक सुविधा नहीं बल्कि इंडस्ट्री का मुख्य इंजन बन चुका है। ई-रिटेल क्षेत्र में होने वाली कुल नई ग्रोथ का 45% से 50% हिस्सा इसी सेगमेंट से आने का अनुमान है, जिसकी वैल्यू $65 बिलियन से $70 बिलियन तक हो सकती है। वर्तमान में Blinkit का मार्केट शेयर करीब 44% है, जिसके बाद Zepto 25% और Swiggy Instamart 20% की हिस्सेदारी के साथ मैदान में हैं। इन कंपनियों का फोकस डार्क स्टोर्स (Dark Stores) के जाल को फैलाने पर है, जो साल 2025 के 2,525 से बढ़कर 2030 के अंत तक 7,500 तक पहुंच सकते हैं।
नई चुनौतियां और रिस्क
अब टियर II और टियर III शहरों के ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। जेन Z (Gen Z) अब सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे हैं। हालांकि, इन कंपनियों के सामने मुनाफे (Profitability) का सबसे बड़ा संकट खड़ा है। लॉजिस्टिक्स और कस्टमर एक्विजिशन की भारी लागत के कारण कई कंपनियां अभी भी घाटे में हैं।
टेक्नोलॉजी का सहारा
ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए रिटेलर्स अब AI और मशीन लर्निंग का सहारा ले रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इन तकनीकों से रिटेल प्रोडक्टिविटी में 37% तक का इजाफा हो सकता है। जैसे-जैसे ऑनलाइन ग्राहकों की संख्या 440 मिलियन तक पहुंचेगी, इन कंपनियों के लिए असली चुनौती तेजी और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की होगी।
