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Indian Consumer Stocks Split: किसी की चांदी, तो किसी की राह मुश्किल! Nomura की रिपोर्ट में खुला राज

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Consumer Stocks Split: किसी की चांदी, तो किसी की राह मुश्किल! Nomura की रिपोर्ट में खुला राज
Overview

Nomura की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंज्यूमर स्टॉक मार्केट में एक बड़ा डिविजन (division) देखने को मिल रहा है। Titan, Tata Consumer और Godrej Consumer Products जैसी टॉप कंपनियां अपनी प्राइसिंग पावर (pricing power) के दम पर अच्छा कर रही हैं, जबकि Dabur India, Colgate-Palmolive (India) Limited और United Spirits जैसी कंपनियां बढ़ती लागतों (rising costs) और डिमांड की दिक्कतें झेल रही हैं।

Nomura की लेटेस्ट रिपोर्ट ने भारत के कंज्यूमर सेक्टर में एक साफ डिविजन (division) दिखाया है, जहां ग्लोबल मार्केट के पॉजिटिव संकेत अब फीके पड़ रहे हैं। Nomura ने Titan Company, Tata Consumer Products और Godrej Consumer Products जैसी कंपनियों पर दांव लगाने की सलाह दी है। ये कंपनियां अपनी मजबूत एग्जीक्यूशन (execution) और प्राइसिंग पावर के चलते बढ़ती इनपुट कॉस्ट (input cost) और ऊबड़-खाबड़ डिमांड (inconsistent demand) को बेहतर तरीके से संभाल पा रही हैं।

Titan Company, खासकर डिस्क्रिशनरी सेगमेंट (discretionary segment) में, 47% साल-दर-साल (year-on-year) रेवेन्यू ग्रोथ के साथ सबसे आगे रहने की उम्मीद है। इसके ज्वैलरी सेगमेंट में 50% से अधिक की तेजी देखी जा सकती है। Tata Consumer Products अपने कोर सॉल्ट (salt) बिजनेस में 12% की ग्रोथ और नए वेंचर्स (ventures) में 25-30% की ग्रोथ बनाए रखने की उम्मीद है। Godrej Consumer Products स्मार्ट इन्वेंटरी मैनेजमेंट (inventory management) की मदद से 24-25% के हेल्दी प्रॉफिट मार्जिन (profit margin) का लक्ष्य बनाए हुए है।

इसके अलावा, Nestlé India और Britannia Industries जैसी बड़ी कंपनियों में भी पॉजिटिव सरप्राइज (positive surprise) देखने को मिल सकता है। Nestlé को लगभग 11% की हेल्दी वॉल्यूम ग्रोथ (volume growth) के साथ मार्जिन में भी बढ़त की उम्मीद है, क्योंकि रॉ मटेरियल कॉस्ट (raw material cost) कम हो रही है। Britannia Industries को इनपुट कॉस्ट कम होने और टैक्स एडजस्टमेंट (tax adjustment) से कंजम्पशन बढ़ने की उम्मीद के चलते EBITDA ग्रोथ में करीब 20% की बढ़त मिल सकती है।

लेकिन, कुछ कंपनियां बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। Dabur India की ओवरऑल ग्रोथ घटकर लगभग 4.5% रह सकती है, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल सप्लाई चेन (global supply chain) की दिक्कतें हैं, भले ही डोमेस्टिक परफॉरमेंस (domestic performance) मजबूत हो। Colgate-Palmolive (India) Limited को GST के बाद 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (inverted duty structure) की वजह से मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ रहा है, जिससे ऑपरेटिंग प्रॉफिट (operating profit) थोड़ा कम हो सकता है। United Spirits में भी वॉल्यूम में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जो LPG की कमी से जुड़े ग्लास के बढ़ते दामों के कारण और भी बिगड़ गई है।

ओवरऑल कंज्यूमर सेक्टर में प्राइसिंग स्ट्रैटेजी (pricing strategy) बदल रही है और कॉस्ट की चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। Paint makers जैसे Asian Paints और Berger Paints ने बढ़ती इनपुट कॉस्ट को कवर करने के लिए औसतन 8% तक कीमतें बढ़ाई हैं। वहीं, Marico ने अपने Parachute प्रोडक्ट्स पर सेलेक्ट आइटम्स पर 17% तक की कीमतें कम की हैं। ITC के सिगरेट बिजनेस में टैक्स के बाद 30% से ज्यादा की प्राइस बढ़ोतरी के कारण वॉल्यूम में लगभग 3.5% की गिरावट की उम्मीद है। क्रूड ऑयल (crude oil) और दूसरी कमोडिटीज (commodities) को प्रभावित करने वाले जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स (geopolitical factors) के कारण इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन (input cost inflation) एक बड़ी चिंता बनी हुई है। Nuvama Institutional Equities का अनुमान है कि अगर मौजूदा ट्रेंड (trend) जारी रहा, तो Q1 फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) में FMCG सेक्टर में 3-4% तक की प्राइस बढ़ोतरी हो सकती है। पैकेजिंग (packaging) और फ्रेट कॉस्ट (freight cost) में भी तेज उछाल आया है, जिससे मार्जिन और दब रहा है।

मार्केट साफ तौर पर अलग-अलग कंपनियों को उनके यूनिक फैक्टर्स (unique factors) के आधार पर अलग कर रहा है। Titan की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, खासकर ज्वैलरी में, यह दिखाती है कि गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद डिमांड को वैल्यू में बदलने की उसकी क्षमता। Tata Consumer की स्ट्रेटेजिक डाइवर्सिफिकेशन (strategic diversification) और सॉलिड कोर बिजनेस परफॉरमेंस प्रीमियम स्ट्रैटेजी (premiumization strategy) को दर्शाती है। Godrej Consumer का मार्जिन स्टैबिलिटी (margin stability), जो कि स्मार्ट इन्वेंटरी मैनेजमेंट से मिली है, उसे कमोडिटी प्राइस स्विंग्स (commodity price swings) के प्रति वल्नरेबल (vulnerable) पियर्स (peers) से अलग करती है। इसके विपरीत, Dabur का MENA जियोपॉलिटिकल रिस्क (MENA geopolitical risk) में एक्सपोजर, Colgate-Palmolive का 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' से प्रॉफिटेबिलिटी चैलेंज और United Spirits की सप्लाई चेन की दिक्कतें दिखाती हैं कि कैसे स्पेसिफिक ऑपरेशनल और रेगुलेटरी चुनौतियां अलग-अलग कंपनियों के परफॉरमेंस पर गहरा असर डाल सकती हैं।

भारतीय कंज्यूमर सेक्टर अब ब्रॉड इकोनॉमिक टेलविंड्स (broad economic tailwinds) से हटकर कंपनी के एग्जीक्यूशन, प्राइसिंग पावर और कॉस्ट मैनेजमेंट पर फोकस कर रहा है। एनालिस्ट्स (Analysts) आमतौर पर Britannia Industries पर 'आउटपरफॉर्म' (Outperform) रेटिंग बनाए हुए हैं, जिनके एवरेज प्राइस टारगेट (price target) में अच्छी-खासी अपसाइड (upside) दिख रही है। Tata Consumer Products ने भी लगातार पॉजिटिव परफॉरमेंस और स्ट्रेटेजिक एक्वीजिशन (strategic acquisition) से आगे की सोच वाली स्ट्रैटेजी दिखाई है। हालांकि इनपुट कॉस्ट का दबाव फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) में भी जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन मजबूत फंडामेंटल्स (fundamentals), डाइवर्स पोर्टफोलियो (diverse portfolio) और कॉस्ट पास-ऑन करने की क्षमता वाली कंपनियां मार्केट में आगे रहेंगी।

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