भारत का घरेलू परिधान बाजार तेजी से फल-फूल रहा है और **2029** तक इसके **$146.3 अरब** तक पहुंचने का अनुमान है। **9%** की सालाना दर से बढ़ रहे इस सेक्टर में छोटे शहरों की बढ़ती मांग और कैजुअल वियर का क्रेज बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में $95.7 अरब का रहने वाला यह बाजार 2029 तक $146.3 अरब तक पहुंच सकता है। इस ग्रोथ का मुख्य इंजन अब मेट्रो शहर नहीं, बल्कि ग्रामीण और छोटे कस्बे हैं, जो देश के कुल कपड़ों की खपत का 58% हिस्सा संभाल रहे हैं।
रिटेल दिग्गजों की नई चाल
बदलती प्राथमिकताओं को देखते हुए Trent Ltd, Aditya Birla Fashion & Retail, Arvind Fashions और Raymond जैसी कंपनियां अपनी स्ट्रैटेजी बदल रही हैं। ये दिग्गज अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपना नेटवर्क तेजी से फैला रहे हैं ताकि लॉन्ग-टर्म मार्केट शेयर को सुरक्षित किया जा सके।
कैजुअल वियर का बोलबाला
बाजार में अब फॉर्मल की जगह कैजुअल और फंक्शनल कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा है। खासकर विमेंस वियर और किडस वियर सबसे तेजी से बढ़ते सेगमेंट बनकर उभरे हैं। Page Industries जैसी कंपनियां, जो एथलीजर और हाई-परफॉर्मेंस फैब्रिक पर फोकस करती हैं, इस ट्रेंड का सीधा फायदा उठा रही हैं। हालांकि, इस बदलाव के लिए इन्वेंट्री मैनेजमेंट और लोकेलाइज्ड मर्चेंडाइजिंग पर भारी निवेश की जरूरत है, जिसका असर शॉर्ट-टर्म मार्जिन पर पड़ सकता है।
निवेशक इन रिस्क पर रखें नजर
विकास की इस कहानी के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं। मैन्युफैक्चरिंग हब में बढ़ती लेबर कॉस्ट कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल रही है। इसके अलावा, ई-कॉमर्स में हाई रिटर्न रेट और बदलते ग्लोबल ट्रेड डायनामिक्स (खासकर यूएस टैरिफ) एक्सपोर्ट-हेवी कंपनियों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। आने वाले समय में उन कंपनियों के शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं जो अपने विस्तार और लागत नियंत्रण के बीच सही संतुलन बना पाएंगी।
