FTA ने खोली प्रीमियम स्पिरिट्स की लॉटरी
भारत का अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। कंज्यूमर अब सिर्फ वॉल्यूम के बजाय 'बेहतर पीने' (drink better) पर ज़ोर दे रहे हैं। इस ट्रेंड को India-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से और बल मिला है। 2026 की शुरुआत में लागू हुए इस एग्रीमेंट के तहत, यूके से आने वाली व्हिस्की और जिन पर इम्पोर्ट ड्यूटी 150% से घटकर पहले 75% और फिर अगले 10 सालों में 40% हो जाएगी।
इसका सीधा फायदा United Spirits (USL) जैसी कंपनियों को होगा, जिनके पोर्टफोलियो में Johnnie Walker और Black & White जैसे प्रीमियम स्कॉच ब्रांड्स शामिल हैं। ड्यूटी कटने से इन लग्ज़री ब्रांड्स की कीमतें घरेलू प्रीमियम व्हिस्की के करीब आ जाएंगी, जिससे वे ज़्यादा लोगों की पहुँच में होंगे। अनुमान है कि इससे लोकप्रिय स्कॉच ब्रांड्स की 750ml बॉटल की कीमत करीब ₹200–300 तक कम हो सकती है। 4 फरवरी, 2026 तक United Spirits (UNITDSPR.BO) का शेयर ₹1,366.10 पर ट्रेड कर रहा था, जो बाज़ार में तेज़ी दिखाता है, लेकिन यह अभी FTA के पूरे असर का संकेत नहीं है। USL में रोज़ाना औसतन 99,040 शेयर ट्रेड होते हैं, जो निवेशकों की लगातार दिलचस्पी को दर्शाता है।
भारतीय सिंगल माल्ट्स की दुनिया भर में धूम
सिर्फ इम्पोर्टेड ब्रांड्स ही नहीं, बल्कि भारतीय सिंगल माल्ट्स भी अब ग्लोबल स्टेज पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल रहे हैं, जिसने घरेलू बाज़ार में इनकी डिमांड को और बढ़ा दिया है। फाइनेंशियल ईयर 19 से फाइनेंशियल ईयर 24 के बीच भारत में सिंगल माल्ट व्हिस्की की ग्रोथ 22% सालाना (CAGR) रही है। Rampur, Godawan और Pernod Ricard के Longitude 77 जैसे ब्रांड्स इस बात का सबूत हैं कि भारतीय डिस्टिलर्स इनोवेशन के ज़रिए अपनी वैल्यू बढ़ा रहे हैं और बेहतर प्राइजिंग पावर हासिल कर रहे हैं।
USL की धाक और Valuations की चुनौती
Diageo की सब्सिडियरी United Spirits (USL) इस प्रीमियम शिफ्ट की सबसे बड़ी लाभार्थी बनने की राह पर है। कंपनी का प्रीमियम और उससे ऊपर (Premium & Above - P&A) सेगमेंट में करीब 45% मार्केट शेयर है, जो इसके नेट सेल्स का लगभग 90% बन गया है। 3 फरवरी, 2026 तक USL का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹99,305 करोड़ था, और इसका P/E रेश्यो करीब 57.73 था। यह वैल्यूएशन काफी ज़्यादा है, क्योंकि यह अपने बुक वैल्यू का 11.7 गुना है। हालांकि, Nomura ने 'Buy' रेटिंग के साथ ₹1,650 का टारगेट प्राइस दिया है, जो करीब 25% की और तेज़ी का संकेत देता है।
दूसरी ओर, Competitor Radico Khaitan (RADICO) का मार्केट कैप ₹37,059 करोड़ है, लेकिन इसका P/E रेश्यो करीब 71.71 है। Radico Khaitan का 89.64 (TTM) का P/E रेश्यो बताता है कि बाज़ार इसकी प्रीमियम ब्रांड स्ट्रेटेजी और एक्सपोर्ट क्षमता को पहले ही डिस्काउंट कर चुका है। दोनों प्रमुख कंपनियों के लिए यह ऊंचा P/E दर्शाता है कि निवेशक भविष्य में भारी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, जो एक संभावितvaluation हेडविंड (चुनौती) बन सकता है अगर ग्रोथ धीमी पड़ती है या FTA का पूरा फायदा बाज़ार में नहीं दिखता।
डेमोग्राफिक बदलाव और मार्केट की मजबूती
भारत में हर साल लगभग 1.3 करोड़ नए वयस्क (drinking-age population) जुड़ रहे हैं, जो लंबी अवधि में वॉल्यूम ग्रोथ के लिए बड़ा अवसर पैदा करते हैं। मिलेनियल्स और जेन Z जैसे युवा वर्ग 'बेहतर पीने' के ट्रेंड को बढ़ा रहे हैं, वे क्वालिटी और एक्सपीरियंस को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं। यह ग्लोबल ट्रेंड के विपरीत है जहाँ जेन Z स्वास्थ्य और पैसों की कमी के चलते कम शराब पी रहा है।
लेकिन भारत के बाज़ार की अपनी खासियतें हैं। राज्यों के अलग-अलग रेगुलेशन और डिस्ट्रिब्यूशन की जटिलताओं के कारण नए प्लेयर्स के लिए बाज़ार में आना मुश्किल है, जिससे USL और Radico Khaitan जैसी स्थापित कंपनियों की स्थिति मज़बूत होती है। Radico Khaitan का 100 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट का बड़ा नेटवर्क भी इसके लिए एक अहम ग्रोथ फैक्टर है। USL के पास Royal Challengers Bengaluru (RCB) IPL टीम भी है, जो इसके ओवरऑल EBITDA में करीब 8% का योगदान देती है और जिसकी वैल्यू प्रति शेयर लगभग ₹150 मानी जाती है, जो इसके कोर बिज़नेस से अलग एक वैल्यू एड करता है।
भविष्य की राह और सेक्टर ट्रेंड्स
Nomura की USL के लिए पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद, बाज़ार प्रीमियम की ओर बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि प्रीमियम और क्राफ्ट स्पिरिट्स मास कैटेगरी की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिनकी ग्रोथ रेट 10-15% के बीच है। IWSR के मुताबिक, प्रीमियम कैटेगरीज़ ने H1 2025 में वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में 8% की ग्रोथ देखी, जबकि आयरिश व्हिस्की जैसी niche कैटेगरीज़ 23% तक बढ़ीं। उम्मीद है कि भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शराब बाज़ार (वॉल्यूम के हिसाब से) बन जाएगा। हालांकि, USL और Radico Khaitan जैसे लीडिंग प्लेयर्स के लिए हाई P/E रेश्यो यह बताते हैं कि भविष्य की ज़्यादातर ग्रोथ की कीमत पहले ही तय हो चुकी है। ऐसे में, कंपनी के एग्जीक्यूशन (performance) और लगातार डिमांड को बनाए रखने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखनी होगी। FTA एक बड़ा बूस्ट है, लेकिन इसका पूरा असर अगले एक दशक में ही समझ आएगा।
