नतीजों का बूस्टर, पर टैक्स का 'बादल' मंडराया
ITC लिमिटेड के शेयर शुक्रवार को शेयर बाज़ार में 5% से ज़्यादा उछल गए और ₹327.80 के स्तर पर बंद हुए। यह तेज़ी कंपनी के तीसरी तिमाही, फाइनेंशियल ईयर 2026 (Q3 FY26) के शानदार नतीजों के चलते आई, जिसमें कंसोलिडेटेड ग्रॉस रेवेन्यू साल-दर-साल 7.1% बढ़कर ₹19,200 करोड़ (स्टैंडअलोन ग्रॉस रेवेन्यू) तक पहुंचा। इस दौरान, FMCG-Others सेगमेंट में 11% की जोरदार ग्रोथ देखी गई, वहीं सिगरेट बिज़नेस ने भी 8.2% का इजाफा दर्ज किया। कंपनी के बोर्ड ने ₹6.50 प्रति शेयर के इंटरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है।
FMCG और सिगरेट सेगमेंट में दमदार प्रदर्शन
ITC के FMCG-Others सेगमेंट ने इस बार खास दम दिखाया, जहां 11% की रेवेन्यू ग्रोथ के साथ EBITDA मार्जिन 145 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा। डिजिटल-फर्स्ट और ऑर्गेनिक ब्रांड्स जैसे Yogabar और Mother Sparsh में 60% की जबरदस्त उछाल आई। वहीं, Aashirvaad Atta और Sunfeast जैसे ब्रांड्स की मजबूत परफॉरमेंस से इस सेगमेंट के PBIT (प्रॉफिट बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्स) में 42% की बढ़ोतरी हुई। सिगरेट बिज़नेस ने भी प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ध्यान और वॉल्यूम-ग्रोथ के दम पर 7.9% का नेट सेगमेंट रेवेन्यू बढ़ाया, जो कंपनी की मजबूती दर्शाता है।
टैक्स के 'तूफान' का बड़ा खतरा
मगर, इन सकारात्मक नतीजों के बीच एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) और एक्साइज ड्यूटी में बड़ा इजाफा होने वाला है। सिगरेट पर GST की दर 28% से बढ़कर 40% हो गई है, और नई एक्साइज ड्यूटी संरचना ₹2,100 से ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक्स तक है। ऐसे में, सिगरेट पर कुल टैक्स का बोझ 40% से 50% तक पहुँच सकता है।
कीमतों में उछाल, वॉल्यूम में गिरावट की आशंका
इतिहास गवाह है कि जब-जब तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ा है, शेयर बाज़ार में ITC के स्टॉक में गिरावट आई है। पिछली बार बजट 2026 के ऐलान के बाद शेयर लगभग 15% तक गिर गया था। इंडस्ट्री की मानें तो टैक्स के बोझ को कम करने के लिए कंपनियां कीमतों में 25% से 40% तक का इजाफा कर सकती हैं, जिससे इंडस्ट्री के वॉल्यूम में 6% से 8% की कमी आ सकती है। इसके अलावा, ज़्यादा टैक्स की वजह से अवैध (illicit) तंबाकू व्यापार को बढ़ावा मिलने की भी आशंका है, जिससे सरकार को सालाना करीब ₹23,000 करोड़ का चूना लग सकता है।
वैल्यूएशन और डायवर्सिफिकेशन का खेल
फिलहाल, ITC का ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ्स (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 18.3x से 19.8x के बीच है, जो Nifty FMCG इंडेक्स के 36.4x से 43.71x के P/E से काफी कम है। वहीं, VST Industries का P/E 13.2x से 17.8x और Godfrey Phillips India का 28.84x है। ITC का यह कम P/E शायद बाज़ार के सिगरेट बिज़नेस से जुड़े जोखिमों को दर्शाता है। RSI (14) का 25.0 के आसपास होना इसे ओवरसोल्ड जोन में दिखाता है, जो छोटी अवधि की रिकवरी का संकेत दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि के जोखिम बने हुए हैं।
कंपनी अपने नॉन-सिगरेट बिज़नेस, जैसे Agri Business (जिसमें 6.3% की ग्रोथ आई) और Paperboards, Paper & Packaging (जिसमें 11% का मुनाफा बढ़ा) को लगातार मज़बूत कर रही है। इसके अलावा, FoodTech बिज़नेस 70 लोकेशन्स पर पहुँच गया है और अब तक ₹150 करोड़ का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) जनरेट कर चुका है। ये डायवर्सिफिकेशन एफर्ट्स सिगरेट पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
बाज़ार के जानकारों (एनालिस्ट्स) की राय बंटी हुई है। ज़्यादातर 'न्यूट्रल' या 'होल्ड' रेटिंग दे रहे हैं, लेकिन उनका अनुमान है कि अगले 12 महीनों में स्टॉक 21% से 33% तक बढ़ सकता है, जो ₹378 से ₹433 के लक्ष्य तक जा सकता है। यह उम्मीद इस बात पर टिकी है कि कंपनी टैक्स बढ़त को कीमत बढ़ाने और अपने डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो से कैसे पार पाती है।
ITC का बैलेंस शीट लगभग डेब्-फ्री है और यह लगभग 4.45% का डिविडेंड यील्ड भी दे रहा है, जो इसकी वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है। हालांकि, आने वाले समय में सिगरेट सेगमेंट पर टैक्स बढ़त का अंतिम असर देखना बाकी है।