ITC के शेयर सोमवार को **4%** बढ़कर **₹292.55** के एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। यह तेजी सिगरेट की मांग पर आई पॉजिटिव ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के बाद देखने को मिली। निवेशकों को अब भरोसा है कि कंपनी टैक्स बढ़ोतरी के बावजूद रणनीतिक मूल्य वृद्धि के जरिए अपने मुनाफे को बचा सकती है।
सिगरेट वॉल्यूम में आई स्थिरता
ITC Ltd. के शेयर सोमवार को 4.11% की मजबूती के साथ ₹292.55 के स्तर पर बंद हुए, जो पिछले एक महीने का उच्चतम स्तर है। हाल ही में आई ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का सिगरेट बिजनेस रेगुलेटरी और टैक्स के दबाव के बावजूद मजबूत बना हुआ है।
हाल ही में कंपनी के तिमाही मुनाफे में 27% की गिरावट आकर ₹3,579 करोड़ रहा था। लेकिन, इन नतीजों के बावजूद शेयर में तेजी देखी जा रही है, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि ITC अपने मुख्य सिगरेट ब्रांड्स की मांग को बनाए रखने में कामयाब रहेगी।
कीमतों में बढ़ोतरी और वॉल्यूम पर असर
निवेशकों के मन में यह चिंता थी कि सिगरेट पर बढ़े हुए टैक्स के कारण कहीं ग्राहक सस्ती या अवैध सिगरेट की ओर न मुड़ जाएं। हालांकि, नए आंकड़ों से पता चलता है कि सिगरेट की बिक्री (वॉल्यूम) स्थिर बनी हुई है, जिससे पहले की आशंकाएं गलत साबित हुई हैं।
यह स्थिरता ITC को धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी करने का मौका देती है। इस तरह, कंपनी अपनी मार्केट हिस्सेदारी को बचाए रखते हुए टैक्स के असर को अपने मुनाफे पर कम कर पाएगी।
ब्रोकरेज की रिपोर्ट
Jefferies, Nomura, और HSBC जैसी वित्तीय संस्थाओं का मानना है कि हालिया टैक्स समायोजन का सबसे बुरा असर अब कंपनी पर से टल गया है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, जून तिमाही सिगरेट के मुनाफे के लिए सबसे निचला स्तर रही होगी।
एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में कीमतों में बढ़ोतरी का असर दिखने लगेगा और कंपनी के प्रदर्शन में धीरे-धीरे सुधार होगा। Dolat Capital का कहना है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर एक बदलाव का दौर है, और साल के अंत तक ITC अपने सिगरेट सेगमेंट में मुनाफे को बहाल करने की बेहतर स्थिति में होगी।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
हालांकि, बाजार का सेंटिमेंट अभी पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी कीमतों में बढ़ोतरी और ग्राहकों की मांग के बीच संतुलन कैसे बनाती है। सिगरेट सेगमेंट ITC के कैश फ्लो का मुख्य जरिया है, जिससे कंपनी अपने दूसरे कंज्यूमर गुड्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर्स में विस्तार करती है।
आने वाली तिमाहियों में, कीमतों में बढ़ोतरी का ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर देखना अहम होगा। इसके अलावा, किसी भी तरह के रेगुलेटरी बदलाव या एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी कंपनी के लिए एक स्ट्रक्चरल रिस्क बनी रहेगी।
