ITC Share Price: निवेशकों को झटका! शेयर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर, मुनाफे में आई 16% की गिरावट

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AuthorAditya Rao|Published at:
ITC Share Price: निवेशकों को झटका! शेयर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर, मुनाफे में आई 16% की गिरावट

ITC के शेयर आज यानी 17 अगस्त 2026 को 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹273.05 पर आ गए। कंपनी के पहली तिमाही (Q1) के मुनाफे में **16.2%** की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी और इनपुट लागत बढ़ने से दबाव झेल रही है।

क्यों गिरी ITC की चाल?

ITC के शेयर में आज बिकवाली का दबाव देखा गया और यह ₹273.05 के 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए। यह गिरावट कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों के बाद आई है, जिसने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

पहली तिमाही के नतीजे (Q1 FY27)

कंपनी ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में ₹4,394.13 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 16.2% कम है। हालांकि, इसी तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में 27.6% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹29,523.30 करोड़ पर पहुँच गया। रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद मुनाफे में गिरावट, कंपनी के मार्जिन पर पड़ रहे दबाव को दर्शाती है।

मार्जिन पर दबाव की वजहें

ITC को कच्चे माल, जैसे पाम ऑयल और ईंधन, की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, कंपनी के मुख्य सिगरेट बिजनेस पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी का भी असर पड़ा है। मैनेजमेंट का कहना है कि इन बढ़ी हुई लागतों को ग्राहकों पर डालने की कोशिश की गई है, लेकिन सिगरेट बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अवैध सिगरेट के कारण यह मुश्किल हो रहा है। कंपनी ने वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं का भी जिक्र किया है, जिसने कमोडिटी की कीमतों में अस्थिरता पैदा की है।

शेयर होल्डिंग पैटर्न में बदलाव

पिछले एक साल में शेयर होल्डिंग पैटर्न में भी बदलाव आया है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने ITC में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है। जून 2026 तिमाही में उनकी होल्डिंग घटकर 11.3% रह गई, जो जून 2025 में 15.04% थी। वहीं, दूसरी ओर रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है। दिसंबर 2024 में 12.39% से बढ़कर जून 2026 तक यह 13.94% हो गई है।

आगे क्या?

आगे चलकर निवेशकों की नजर कंपनी की आने वाली तिमाहियों में मार्जिन को बचाने की क्षमता पर रहेगी। FMCG और सिगरेट सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ की रिकवरी और इनपुट लागत में बढ़ोतरी का ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर देखना अहम होगा। कंपनी की नई बिजनेस जैसे फ्रेश फूड्स और वैल्यू-एडेड एग्री-प्रोडक्ट्स में टैक्स से जुड़े दबाव को कम करने की क्षमता भी कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.