टैक्स के 'तूफान' से निपटने की रणनीति
ITC Ltd. ने सिगरेट की कीमतों में इजाफा करके एक बड़ी चाल चली है। यह फैसला कंपनी के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह सरकार द्वारा लगाए गए नए एक्साइज ड्यूटी और 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाले 40% के ऊंचे GST रेट के प्रभाव को कम करने की कोशिश है। इस कीमत समायोजन का मुख्य उद्देश्य कंपनी के सिगरेट सेगमेंट के मार्जिन को बचाना है, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 40% से अधिक हिस्सा है। हालांकि, यह कदम बढ़ती परिचालन लागत और बाजार के अन्य सूचकांकों की तुलना में ऐतिहासिक रूप से कमजोर प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
शेयर में 'टैक्टिकल' तेजी
मंगलवार को ITC के शेयर में थोड़ी बढ़त दिखी। शेयर ₹318.45 पर खुला और दिन के कारोबार में ₹328.05 के उच्च स्तर को छूने के बाद ₹325.25 के करीब बंद हुआ। यह उछाल सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों के साथ आया। सरकार ने टोबैको प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यूटी को ₹2,050 से ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक्स तक बढ़ा दिया है, साथ ही 40% GST भी लागू किया है। इन नए लेवीज़ ने पिछले कंपनसेशन सेस को बदल दिया है, जिसका मकसद सरकारी राजस्व और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को बढ़ाना है। इस खबर के बाद, NSE पर लगभग 2.84 करोड़ शेयरों का कारोबार हुआ, जिससे निवेशकों की बढ़ी हुई रुचि का पता चलता है।
एनालिस्ट्स का विश्लेषण: मिश्रित संकेत
ITC का पिछले बारह महीनों का P/E रेश्यो (TTM) लगभग 19.56x है। इसकी तुलना में, VST Industries का P/E रेश्यो करीब 16.75x है, जबकि Godfrey Phillips India का P/E 24.87x से 30.99x के बीच है। ऐतिहासिक रूप से, ITC निफ्टी इंडेक्स से काफी पीछे रहा है। पिछले एक साल में जहां निफ्टी में जबरदस्त तेजी आई, वहीं ITC के शेयर में 21% की गिरावट आई। दो साल और तीन साल में भी यह क्रमशः 15% और 10% नीचे रहा है। भारतीय FMCG सेक्टर में 2026 तक ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन ITC के टोबैको बिजनेस पर रेगुलेटरी दबाव इसके लिए चुनौती बना हुआ है। इससे पहले 1 जनवरी 2026 को भी ऐसे ही टैक्स बढ़ोतरी के बाद शेयर में लगभग 10% की गिरावट देखी गई थी।
मार्जिन पर दबाव और ब्रोकरेज की 'डाउनग्रेड' राय
कंपनी का अपनी सिगरेट बिजनेस पर ज्यादा निर्भर रहना, जो रेवेन्यू का 40% से अधिक और मुनाफे का बड़ा हिस्सा है, बढ़ते टैक्स के सामने एक बड़ा जोखिम पैदा करता है। हालांकि ITC ने ₹6.50 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है, लेकिन नया टैक्स ढांचा ( 40% GST और नई एक्साइज ड्यूटी) मार्जिन को कम कर सकता है, अगर कीमत वृद्धि बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए पर्याप्त न हो। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स, जैसे Systematix के विश्लेषकों ने FY26-FY28 के लिए रेवेन्यू और EPS अनुमानों को कम कर दिया है। उनका मानना है कि रेवेन्यू बनाए रखने के लिए 25-35% तक की कीमत वृद्धि की आवश्यकता हो सकती है, जो ग्राहकों को सस्ते, अवैध विकल्पों की ओर धकेल सकती है। टैक्स बढ़ोतरी के बाद छह ब्रोकरेज फर्मों ने ITC की रेटिंग घटाई है, और Emkay Global ने इसे 'Reduce' रेटिंग दी है, जो इसके निकट-से-मध्यम अवधि के आउटलुक को प्रभावित कर सकती है। स्टॉक का RSI 18.4 पर ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत दे रहा है, लेकिन अगर अर्निंग उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी तो यह और गिरावट का संकेत हो सकता है।
भविष्य की राह: अनिश्चितता के बीच उम्मीद
ITC पर एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, ज्यादातर 'न्यूट्रल' या 'होल्ड' की सलाह दे रहे हैं। अगले 12 महीनों के लिए औसत प्राइस टारगेट लगभग ₹381.78 है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 20% की संभावित अपसाइड दिखाता है। हालांकि, यह औसत राय में बड़े अंतर को छिपाता है, जहां कुछ एनालिस्ट्स 'बाय' रेटिंग और उच्च टारगेट दे रहे हैं, वहीं टैक्स के प्रभाव के कारण अन्य ने अपनी अर्निंग अनुमानों को काफी कम कर दिया है। रेगुलेटरी दबाव के सामने अल्पकालिक मूल्य वृद्धि की स्थिरता और कंपनी की नॉन-सिगरेट बिजनेस में ग्रोथ बढ़ाने की क्षमता, इसके भविष्य के प्रदर्शन को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।