ITC Share Price: FMCG सेक्टर की बहार, ITC में आई रिकॉर्ड तेजी! पर टैक्स का 'ग्रहण' अभी बाकी?

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AuthorAditya Rao|Published at:
ITC Share Price: FMCG सेक्टर की बहार, ITC में आई रिकॉर्ड तेजी! पर टैक्स का 'ग्रहण' अभी बाकी?
Overview

ITC के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। शेयर लगातार तीसरे दिन चढ़े हैं, जो FMCG सेक्टर में आई बहार और भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम का नतीजा है। शेयर **4%** उछलकर **₹317** पर पहुंच गया, जिससे कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन करीब **₹3.97 ट्रिलियन** हो गया। हालांकि, टोबैको पर नए टैक्स बदलाव और पिछली अंडरपरफॉर्मेंस को देखते हुए एनालिस्ट्स अभी भी कुछ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

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29 अप्रैल 2026, बुधवार को ITC के शेयरों में लगातार तीसरे सत्र में तेजी देखी गई। शेयर 4% चढ़कर ₹317 के स्तर पर पहुंच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी जोरदार इजाफा हुआ, जो पिछले दिन के 1.3 करोड़ शेयरों से बढ़कर करीब 2.1 करोड़ शेयरों पर पहुंच गया। इस उछाल से ITC का मार्केट कैप बढ़कर लगभग ₹3.97 ट्रिलियन हो गया। व्यापक Nifty FMCG इंडेक्स भी 2.2% ऊपर था, जो सेक्टर में मिल रहे सपोर्ट को दिखाता है। टेक्निकल एनालिस्ट राजेश भोसले का कहना है कि ₹310 के स्तर के ऊपर एक पॉजिटिव सिग्नल दिख रहा है, जो 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के करीब है। उनके मुताबिक, शेयर में ₹330-₹340 तक की और बढ़त की संभावना है, जबकि ₹300 एक मजबूत सपोर्ट बना रहेगा।

हालिया उछाल के बावजूद, ITC के वैल्यूएशन पर अलग-अलग रिपोर्टों में मतभेद है। कंपनी का P/E रेश्यो 10.79 से 15.78 के बीच बताया जा रहा है, जो FMCG इंडस्ट्री के औसत 16.26 से मामूली ही कम है। यह वैल्यूएशन, Hindustan Unilever (HUL) जैसे 19.0, Dabur India (India) का 36.6, और Nestle India (India) का 77.8 जैसे अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में काफी कम है। ये आंकड़े ITC की ग्रोथ और रेगुलेटरी मुद्दों को लेकर चिंताएं जाहिर कर सकते हैं। पिछले प्रदर्शन की बात करें तो, ITC का स्टॉक इस साल 2026 में अब तक 13% गिर चुका है, जबकि Nifty में 7% की गिरावट आई है। पिछले एक साल में ITC 26% टूटा, वहीं Nifty सपाट रहा। पिछले दो और तीन सालों में भी कंपनी ने निगेटिव रिटर्न दिया है, जबकि Nifty ने पॉजिटिव गेन दिखाया है।

यह स्टॉक रैली ऐसे समय में आई है जब ITC के सिगरेट बिजनेस पर नए टैक्स नियमों का दबाव साफ दिख रहा है। फरवरी 2026 की शुरुआत में सरकार द्वारा टोबैको (Tobacco) पर 40% गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) और स्पेसिफिक एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) लागू करने के बाद कंपनी ने कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा। इस टैक्स बढ़ोतरी ने कीमतों को बढ़ाया और एनालिस्ट्स की तरफ से स्टॉक पर डाउनग्रेड हुए। पहले भी टैक्स बढ़ोतरी के कारण वॉल्यूम में गिरावट आ चुकी है; उदाहरण के तौर पर, 2015-16 में टैक्स के कारण कीमतों में 15% से अधिक की बढ़ोतरी के बाद सिगरेट की वॉल्यूम 15% से ज्यादा गिर गई थी। सिगरेट के अलावा, पूरा भारतीय FMCG सेक्टर भी कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। महंगाई (Inflation) का कम होना और कमोडिटी (Commodity) की कीमतें स्थिर रहना अच्छी बात है, लेकिन एल नीनो (El Niño) के कारण मॉनसून कमजोर रहने की आशंका और पैकेजिंग व कुछ कच्चे माल की बढ़ती लागत, मुनाफे और बिक्री को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि हालिया तेजी के बावजूद, ITC के मुख्य सिगरेट बिजनेस पर भारी निर्भरता एक बड़ा जोखिम बनी हुई है, जो उसके रेवेन्यू और मुनाफे का 40% से अधिक हिस्सा है। यह एकाग्रता लगातार टैक्स जोखिमों को बढ़ाती है, जैसा कि हालिया बढ़ोतरी में देखा गया। Hindustan Unilever जैसी पूरी तरह से डायवर्सिफाइड (Diversified) कंपनियों के विपरीत, ITC का मुख्य सिगरेट सेगमेंट लगातार बारीकी से देखा जाता है। टैक्स नियमों को लेकर चल रही अनिश्चितता के कारण, कई एनालिस्ट्स ने 'होल्ड' (Hold) या 'अंडरवेट' (Underweight) रेटिंग बनाए रखी है। उदाहरण के लिए, Morgan Stanley ने इसे ₹290 के टारगेट प्राइस के साथ 'अंडरवेट' रेटिंग दी थी, जबकि Jefferies ने ₹325 पर 'होल्ड' रेटिंग बरकरार रखी। ITC के P/E रेश्यो में 10.79 से 33.8 तक की बड़ी रेंज इसके वैल्यूएशन में मौजूद चुनौतियों को दर्शाती है। कुछ एनालिस्ट्स पिछली अंडरपरफॉर्मेंस और टैक्स जोखिमों के कारण इसे 'वैल्यू ट्रैप' (Value Trap) के तौर पर भी देख रहे हैं। साथ ही, सिगरेट से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा हाई-मार्जिन प्रीमियम प्रोडक्ट्स से आता है, जो कीमत बढ़ने पर प्राइस-सेंसिटिव कस्टमर्स को सस्ते विकल्प या अवैध बाजार की ओर धकेल सकता है।

यह अनिश्चित बना हुआ है कि ITC की वर्तमान स्टॉक रैली कब तक जारी रहेगी। एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट विभिन्न राय दर्शाते हैं। कुछ टारगेट ₹330-₹340 के आसपास हैं, जबकि अन्य इससे ऊपर की ओर इशारा करते हैं। 32 एनालिस्ट्स के एक सर्वे के अनुसार, 12 महीने का औसत टारगेट प्राइस ₹359.06 है, जिसमें हाई ₹486 और लो ₹290 है। यह 10-18% की संभावित वृद्धि का संकेत देता है। हालांकि, कई विश्लेषकों ने चल रही अनिश्चितताओं के कारण 'होल्ड' या 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग की सलाह दी है। आने वाले फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Financial Results) टैक्स बदलावों के तात्कालिक प्रभाव और कंपनी की भविष्य की रणनीतियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.