ITC Limited के Q2 नतीजों ने निवेशकों को मायूस किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट **18.7%** गिरकर **₹4,168.40 करोड़** पर आ गया है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह तंबाकू उत्पादों पर लगा बढ़ा हुआ एक्साइज ड्यूटी है।
ITC Limited के लिए सितंबर 2026 में खत्म हुई दूसरी तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है। तंबाकू उत्पादों पर भारी एक्साइज ड्यूटी ने कंपनी की कमाई पर बुरा असर डाला है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹5,126.11 करोड़ से घटकर इस बार ₹4,168.40 करोड़ रह गया है।\n\n### रेवेन्यू का असली सच\nनतीजों में रेवेन्यू 43.9% उछलकर ₹30,578.40 करोड़ दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को भ्रमित नहीं होना चाहिए। यह इजाफा असल में अकाउंटिंग में बदलाव के कारण हुआ है। अगर इन टैक्स-संबंधित बदलावों को हटा दें, तो बिजनेस की वास्तविक ग्रोथ महज 3.9% ही रही है।\n\n### मार्जिन पर दबाव और अवैध कारोबार\nकंपनी का कोर सिगरेट बिजनेस, जो कमाई का मुख्य जरिया है, भारी दबाव में है। EBITDA मार्जिन घटकर 27.9% रह गया है, जो पिछले साल 34.3% था। मैनेजमेंट ने साफ कहा है कि टैक्स में बढ़ोतरी के कारण लीगल सिगरेट और अवैध सिगरेट के बीच कीमतों का अंतर बढ़ गया है, जिससे अवैध कारोबार (illicit trade) को बढ़ावा मिल रहा है और कंपनी के वॉल्यूम पर खतरा मंडरा रहा है।\n\n### क्या है राहत की बात?\nहालांकि तंबाकू सेक्टर ने संघर्ष किया, लेकिन FMCG बिजनेस ने 20% से ज्यादा की ग्रोथ दिखाई है। इसके अलावा, पेपरबोर्ड और पैकेजिंग बिजनेस भी चमकता दिखा, जिसमें 36% रेवेन्यू और 48% प्रॉफिट का जंप देखा गया। इसका श्रेय अगस्त 2026 में हुए 'Century Pulp and Paper' के इंटीग्रेशन को जाता है।\n\n### आगे की राह\nITC के एग्री-बिजनेस ने 12% की बढ़त दिखाई है, लेकिन वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चेन में रुकावट और फ्रेट कॉस्ट बढ़ने की समस्या बनी हुई है। मानसून और महंगाई के असर के बीच, निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती है और नॉन-टोबैको बिजनेस उसे कितनी मजबूती देता है।
