ITC अपने सिगरेट बिज़नेस को नए प्रोडक्ट्स और सोच-समझकर की गई प्राइसिंग के ज़रिए बदल रहा है, ताकि करीब **70%** तक पहुंचे भारी टैक्स के बोझ को कम किया जा सके। कंपनी का लक्ष्य अवैध व्यापार से मार्केट शेयर बचाना है, साथ ही FMCG में डाइवर्सिफाई करना है, जो अब **2017** की तुलना में कुल मुनाफे में कहीं ज़्यादा योगदान देता है।
Detailed Coverage
टैक्स के बढ़ते बोझ से निपटने की तैयारी
भारत की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी ITC, भारी टैक्स बढ़ोतरी के चलते अपने टोबैको बिज़नेस को फिर से तैयार कर रही है। कंपनी के 115वें एनुअल जनरल मीटिंग में चेयरमैन संजीव पुरी ने बताया कि फर्म अब पोर्टफोलियो को री-आर्किटेक्ट करने और नए प्रोडक्ट वेरिएन्ट्स (SKUs) लॉन्च करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि इन मुश्किलों से निपटा जा सके।
स्ट्रैटेजिक प्राइसिंग और मार्केट की सुरक्षा
कंपनी एक कैलिब्रेटेड प्राइसिंग स्ट्रैटेजी अपना रही है, जिसका मकसद टैक्स की बढ़ती लागत को संतुलित करना है, ताकि अवैध सिगरेट व्यापार के हाथों मार्केट शेयर न गंवाना पड़े। यह कदम वॉल्यूम को स्थिर रखने के साथ-साथ कंज्यूमर की बदलती पसंद के अनुकूल होने के लिए है। मैनेजमेंट ने जोर देकर कहा कि टैक्स के बोझ के बावजूद, कंपनी का मुख्य लक्ष्य ऑपरेशनल एफिशिएंसी और पारंपरिक प्रोडक्ट लाइन्स में इनोवेशन के ज़रिए लगातार वैल्यू क्रिएट करना है।
बिज़नेस मॉडल का विकास
ITC की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा टोबैको सेगमेंट पर निर्भरता कम करना और अन्य FMCG कैटेगरी में विस्तार करना है। 'ITC नेक्स्ट स्ट्रैटेजी' के तहत हुए इंटरनल रीस्ट्रक्चरिंग से पता चलता है कि नॉन-सिगरेट बिज़नेस अब कुल मुनाफे का लगभग 25% हिस्सा बन गए हैं, जो 2017 में 17-18% था। इसी दौरान, कंपनी का कुल नेट प्रॉफिट ₹10,000 करोड़ से बढ़कर ₹20,000 करोड़ हो गया है।
यह बदलाव मुख्य रूप से नॉन-सिगरेट FMCG सेगमेंट से प्रेरित है, जिसका रेवेन्यू एक दशक से भी कम समय में ₹10,000 करोड़ से बढ़कर ₹24,000 करोड़ हो गया है। कंपनी पेपरबोर्ड, पेपर और पैकेजिंग डिवीजन्स के साथ-साथ अपने एग्री-बिजनेस में भी कैपिटल एलोकेशन जारी रखे हुए है, ताकि रेवेन्यू मिक्स को और बेहतर बनाया जा सके।
सब्सिडियरी लिस्टिंग और भविष्य का आउटलुक
अपने कंज्यूमर गुड्स ऑपरेशंस के अलावा, ITC ने अपनी टेक्नोलॉजी सब्सिडियरी ITC Infotech को लेकर भी बात की। मैनेजमेंट ने संकेत दिया कि फिलहाल यह कंपनी अपनी सर्विस कैपेबिलिटीज़ और ग्रोथ बढ़ा रही है, और IT आर्म की संभावित स्टॉक मार्केट लिस्टिंग का फैसला तभी लिया जाएगा जब इसके लिए सही समय होगा।
निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह है कि टैक्स-प्रेरित प्राइस एडजस्टमेंट के बीच सिगरेट वॉल्यूम ग्रोथ कितनी स्थिर रहती है और नॉन-सिगरेट FMCG बिज़नेस में मार्जिन एक्सपेंशन कैसे जारी रहता है। इसके अलावा, कंपनी के प्लान किए गए होटल बिज़नेस डीमर्जर की प्रगति भी आने वाले महीनों में शेयरधारकों के लिए एक अहम घटना होगी।
