ITC Maratha का 'लेफ्टओवर फूड' नियम: क्या ग्राहकों को मिलेगी राहत या बढ़ेगी कानूनी झंझट?

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITC Maratha का 'लेफ्टओवर फूड' नियम: क्या ग्राहकों को मिलेगी राहत या बढ़ेगी कानूनी झंझट?

मुंबई के ITC Maratha होटल में एक अजीबोगरीब नियम चर्चा का विषय बन गया है। यहां मेहमानों को बचा हुआ खाना ले जाने के लिए एक 'डिस्क्लेमर फॉर्म' पर साइन करने को कहा जा रहा है, जिसमें होटल अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।

Detailed Coverage

क्या है यह 'डिस्क्लेमर फॉर्म'?

मुंबई के लग्जरी होटल ITC Maratha में एक नया नियम लागू किया गया है, जिसने मेहमानों के बीच चर्चा छेड़ दी है। होटल ने मेहमानों को बचा हुआ खाना पैक करवाते समय एक 'Disclaimer Form for Leftover Food' भरने के लिए कहा है। इस फॉर्म में साफ लिखा है कि होटल ग्राहक द्वारा ले जाए जाने वाले खाने की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

फॉर्म के अनुसार, ताज़े बने खाने को परोसने के दो घंटे के अंदर खा लेना चाहिए। साइन करके, मेहमान यह स्वीकार करते हैं कि अगर खाना उनके ले जाने के बाद खराब होता है या उससे कोई स्वास्थ्य समस्या होती है, तो होटल इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह एक तरह का कानूनी उपाय है जिससे होटल किसी भी तरह के फूड पॉइजनिंग के दावों से खुद को बचा सके।

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में फूड सेफ्टी का महत्व

हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में फूड सेफ्टी सबसे अहम चीज़ है। भारत में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (FSSAI) के कड़े नियम हैं जिनका पालन बड़े होटल चेन करते हैं। हालांकि कई रेस्टोरेंट टेकअवे की सुविधा देते हैं, पर लग्जरी होटल्स के अपने खास नियम होते हैं ताकि उनकी ब्रांड इमेज पर कोई आंच न आए।

ग्राहकों और इंडस्ट्री पर असर

इस नियम पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना ​​है कि यह एक जायज कदम है, क्योंकि लग्जरी सेगमेंट की कंपनियों को अपने लीगल रिस्क को मैनेज करना होता है। उनका कहना है कि एक बार खाना होटल के कंट्रोल्ड वातावरण से बाहर चला जाए, तो होटल उसकी क्वालिटी की गारंटी नहीं दे सकता, ऐसे में यह डिस्क्लेमर एक समझदारी भरा कदम है।

वहीं, कुछ लोग इस प्रक्रिया को बहुत ज्यादा फॉर्मल और ग्राहकों के लिए निराशाजनक मानते हैं। उनका कहना है कि एक साधारण से रिक्वेस्ट के लिए पर्सनल डिटेल और एक लीगल डॉक्यूमेंट साइन करवाना बेवजह की नौकरशाही है। हालांकि यह नियम अभी इंडस्ट्री में आम नहीं है, पर यह एक नए ट्रेंड की ओर इशारा करता है, जहां बड़ी हॉस्पिटैलिटी कंपनियां ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के मुताबिक अपनी लायबिलिटी डिस्क्लोजर को फॉर्मल बना रही हैं।

निवेशकों और ऑपरेशंस के लिए मायने

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, यह घटना ऑपरेशनल कंप्लायंस और ब्रांड रिस्क मैनेजमेंट के महत्व को दर्शाती है। ITC Hotels, जो बड़े ITC Limited ग्रुप का हिस्सा है, एक रेगुलेटेड माहौल में काम करती है, जहां ग्राहकों का भरोसा और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स सर्वोपरि हैं। लायबिलिटी को फॉर्मल बनाने की ओर यह कदम लीगल खर्चों को कम करने और ब्रांड की प्रीमियम इमेज को सुरक्षित रखने का प्रयास माना जा सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.