क्यों कर रही है ITC ये बड़ा निवेश?
दरअसल, कंपनी का शेयर पिछले एक साल में लगभग 28% तक गिर चुका है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, सिगरेट बिज़नेस पर लगातार बढ़ते टैक्स का दबाव और रेगुलेटरी चुनौतियां ITC के मुनाफे पर असर डाल रही हैं। इन सब को देखते हुए, कंपनी के चेयरमैन और एमडी संजीव पुरी के नेतृत्व में इस ₹20,000 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) प्लान को मंजूरी दी गई है।
डायवर्सिफिकेशन पर ज़ोर
यह इनवेस्टमेंट मुख्य रूप से ITC के एफएमसीजी (FMCG) पोर्टफोलियो, होटल्स, पेपरबोर्ड, पैकेजिंग, एग्री-बिज़नेस और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) जैसे विभिन्न सेगमेंट्स में खर्च किया जाएगा। कंपनी फ्रेश फूड्स जैसे उभरते क्षेत्रों में विस्तार पर खास ध्यान दे रही है, जो पहले से ही 100% सालाना की दर से बढ़ रहा है। इसके साथ ही, कंपनी डिजिटल-फर्स्ट डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल और नए डिजिटल चैनलों को भी मजबूत कर रही है, जो पहले से ही कुल रेवेन्यू का 34% योगदान दे रहे हैं।
वैल्यूएशन गैप और बाजार की उम्मीदें
ITC का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 18.7x है, जो कि हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के 50.0x, नेस्ले इंडिया के करीब 80.0x और डाबर इंडिया के 43.4x जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में काफी कम है। यह दर्शाता है कि बाजार ITC को इन कंपनियों के मुकाबले कम वैल्यू दे रहा है। हालांकि, भारत का एफएमसीजी सेक्टर अगले दशक में 5.6% से 16.6% सालाना की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो ITC की इस रणनीति के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
चुनौतियाँ और जोखिम
ITC के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका सिगरेट बिज़नेस है, जो कंपनी के प्रॉफिट बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्स (PBIT) का 78% हिस्सा है। इस पर हाई टैक्सेशन का लगातार दबाव है। इसके अलावा, कंपनी के इतने विविध बिज़नेस सेगमेंट में इतने बड़े पैमाने पर इनवेस्टमेंट के एग्जीक्यूशन (Execution) का जोखिम भी है। पिछले पांच सालों में ITC की सेल्स ग्रोथ 8.81% रही है, जो यह बताता है कि कंपनी के लिए अपनी टॉप-लाइन ग्रोथ को तेजी से बढ़ाना एक चुनौती रही है।
