ITC, Godfrey Phillips: सिगरेट हो गई 17% महंगी! ग्राहकों पर एक और बोझ

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AuthorAditya Rao|Published at:
ITC, Godfrey Phillips: सिगरेट हो गई 17% महंगी! ग्राहकों पर एक और बोझ
Overview

सिगरेट बनाने वाली दिग्गज कंपनियां ITC Ltd और Godfrey Phillips India Ltd, ग्राहकों के लिए एक और झटका देने वाली खबर ला रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां मई 2026 से अपनी सिगरेट की कीमतों में करीब **17%** तक का इजाफा कर सकती हैं। बता दें कि फरवरी 2026 में एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में बढ़ोतरी के बाद अप्रैल में सिगरेट की बिक्री में पहले ही लगभग **20%** की बड़ी गिरावट आ चुकी है।

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कीमतों में भारी बढ़ोतरी की योजना

ITC Ltd और Godfrey Phillips India Ltd, एक बार फिर सिगरेट पर कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह बढ़ोतरी लगभग 17% तक हो सकती है, जो मई 2026 से लागू हो सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब फरवरी 2026 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बाद से ही कीमतें ऊंची हो चुकी हैं और ग्राहकों की प्रतिक्रिया भी कीमतों के प्रति संवेदनशील दिख रही है। इस रणनीतिक, लेकिन जोखिम भरे कदम का मकसद मुश्किल बाजार में अपने प्रॉफिट मार्जिन्स (Profit Margins) को बचाना है।

ड्यूटी बढ़ाने के बाद गिरी बिक्री

अप्रैल के महीने में सिगरेट की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई। डीलर्स की रिपोर्ट बताती है कि देशभर में सिगरेट के वॉल्यूम (Volume) में 20% तक की कमी आई है। खास तौर पर प्रीमियम किंग-साइज सेगमेंट, जो ITC और Godfrey Phillips दोनों के लिए 30% से ज्यादा रेवेन्यू (Revenue) का जरिया है, उसमें सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। 1 फरवरी 2026 से लागू हुई एक्साइज ड्यूटी में 30-40% की बढ़ोतरी ने रिटेल कीमतों को पहले ही बढ़ा दिया था। उदाहरण के लिए, किंग-साइज सिगरेट की कीमत लगभग ₹20 से बढ़कर ₹25-₹28 प्रति स्टिक हो गई थी, जिसके चलते कुछ ग्राहकों ने सस्ती जगहों पर तलाश शुरू कर दी। यह साफ तौर पर दिखाता है कि कीमतों में और बढ़ोतरी ग्राहकों को मुश्किल में डाल सकती है।

मार्केट शेयर और वैल्यूएशन

भारत के सिगरेट सेक्टर में 73% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली ITC, अप्रैल 2026 तक लगभग 18.69x के पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) पर ट्रेड कर रही है। वहीं, लगभग 16% मार्केट शेयर वाली Godfrey Phillips India का पी/ई रेश्यो 27.0x के आसपास है, जो कि काफी ज्यादा है। एक और कंपनी VST Industries का पी/ई रेश्यो ITC के करीब, यानी लगभग 15.15x है। ऐतिहासिक रूप से, ITC के स्टॉक में एक्साइज ड्यूटी की खबरों के बाद जनवरी 2026 में लगभग 10% की बड़ी गिरावट देखी गई थी। हालांकि, कंपनी ने कीमतों में समायोजन और ऑपरेशनल सुधारों के जरिए वापसी भी की है। Godfrey Phillips के स्टॉक में टैक्स बदलाव की उम्मीदों के चलते लगभग 19% की बड़ी गिरावट आई थी। इन दबावों के बावजूद, फरवरी 2026 के मध्य में दोनों कंपनियों के स्टॉक में 20% तक की तेजी देखी गई थी। यह कीमतों में बढ़ोतरी की उन खबरों के साथ मेल खाता था, जिसके बारे में विश्लेषकों का मानना था कि यह EBIT (Earnings Before Interest and Taxes) में 8-15% की अपेक्षित गिरावट को घटाकर लगभग 2% तक सीमित कर सकता है।

अवैध बाजार को बढ़ावा

कानूनी सिगरेट की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से एक बड़े अवैध बाजार (Illicit Market) को फलने-फूलने का मौका मिल रहा है। अवैध सिगरेटें अब भारत के सिगरेट बाजार का अनुमानित 26.1% हिस्सा बन चुकी हैं, जो दुनिया में चौथा सबसे बड़ा अवैध बाजार है। इस अवैध व्यापार के कारण सालाना ₹21,000-₹23,000 करोड़ के टैक्स रेवेन्यू का नुकसान होता है। जब कानूनी सिगरेटों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो टैक्स्ड (Taxed) लीगल प्रोडक्ट्स और सस्ते, अनटैक्स्ड (Untaxed) इल्लीगल प्रोडक्ट्स के बीच का अंतर बढ़ जाता है। इससे तस्करी और नकली सिगरेट बनाना ज्यादा फायदेमंद और ग्राहकों के लिए आकर्षक हो जाता है, जिससे एक ऐसा चक्र बनता है जहां खपत कम करने के इरादे से किए गए टैक्स इजाफे अनजाने में अवैध बिक्री को बढ़ाते हैं।

तंबाकू कंपनियों के लिए जोखिम

ITC का विविध व्यापार कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन उसका सिगरेट सेगमेंट अभी भी उसका मुख्य प्रॉफिट ड्राइवर है, जो उसे रेगुलेटरी (Regulatory) और वॉल्यूम रिस्क (Volume Risk) के सामने खड़ा करता है। तंबाकू पर अधिक निर्भर Godfrey Phillips India इन दबावों से कहीं ज्यादा अस्थिरता का सामना करती है। एनालिस्ट्स (Analysts) ने चिंता जताई है, कुछ ने एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी के कारण FY27-28 के लिए ITC की अर्निंग्स फोरकास्ट (Earnings Forecasts) को डाउनग्रेड किया है, साथ ही प्रॉफिट मार्जिन में कमी और धीमी बिक्री वॉल्यूम की चेतावनी दी है। सरकार द्वारा नेशनल कैलेमिटी कंटिंजेंट ड्यूटी (NCCD) दर पर की गई घोषणा, जो बिना नई लेजिस्लेशन (Legislation) के भविष्य में ड्यूटी बढ़ाने की अनुमति देती है, एक और संभावित फ्यूचर कॉस्ट (Future Cost) जोड़ती है। यह 1 मई, 2026 को हुए ड्यूटी बदलावों के तत्काल प्रभाव से अलग है। व्यापक FMCG सेक्टर (FMCG Sector) भी महंगाई के कारण कच्चे माल की बढ़ती लागतों के साथ एक अनिश्चित माहौल का सामना कर रहा है, हालांकि 2026 में कम होती महंगाई से व्यापक इंडस्ट्री को सिंगल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ (Volume Growth) और बेहतर मार्जिन्स हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सिगरेट उपभोक्ताओं की कीमतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता इस सेगमेंट को अद्वितीय बनाती है।

एनालिस्ट्स के विचार और आगे क्या?

एनालिस्ट्स आम तौर पर ITC को 'होल्ड' (Hold) या 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग देते हैं, जिनके औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट (Price Target) ₹335.50 और ₹432.75 के बीच हैं, जो स्टॉक में तत्काल ज्यादा ग्रोथ की संभावना कम होने का संकेत देते हैं। निर्माता अपनी प्राइसिंग स्ट्रेटेजी (Pricing Strategy) का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। उन्हें प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने के साथ-साथ कीमतों के प्रति संवेदनशील ग्राहकों को भी बनाए रखना होगा। इसका मतलब अवैध बाजार के लगातार खतरे और चल रही रेगुलेटरी समीक्षाओं का सामना करना भी है। FY27 में तंबाकू क्षेत्र का प्रदर्शन इन टैक्स और प्राइसिंग शिफ्ट्स (Pricing Shifts) के दीर्घकालिक प्रभावों का एक प्रमुख माप होगा।

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