ITC पूर्वी भारत के बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में अपने Aashirvaad डेयरी ऑपरेशंस का तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अनऑर्गनाइज्ड मिल्क मार्केट पर कब्जा करना और उपभोक्ताओं को ब्रांडेड व वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की ओर लाना है।
बाजार पर नजर
ITC अब पूर्वी भारत के दूध बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है। मुंगेर, पटना, मुजफ्फरपुर, गया, रांची, हावड़ा और बर्धमान जैसे शहरों में मौजूद प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए कंपनी अब दही, पनीर, लस्सी और मिष्टी दोई जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर खास फोकस कर रही है। इन प्रोडक्ट्स के जरिए कंपनी अपने FMCG पोर्टफोलियो को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहती है।
'Project Gomukh' से सप्लाई चेन को मजबूती
कंपनी ने 40,000 से ज्यादा डेयरी किसानों को जोड़ने के लिए 'Project Gomukh' शुरू किया है। इस पहल के तहत किसानों को पशु चिकित्सा, बेहतर पशु आहार और मैनेजमेंट की सुविधा दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य 'फार्म-टू-फोर्क' (खेत से सीधे थाली तक) मॉडल को कंट्रोल करना है, ताकि दूध की क्वालिटी बनी रहे।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि, राह इतनी आसान नहीं है। पूर्वी भारत का डेयरी बाजार काफी कॉम्पिटिटिव है, जहां पहले से ही कई दिग्गज नेशनल ब्रांड्स और रीजनल कोऑपरेटिव्स जमे हुए हैं। डेयरी बिजनेस में 'कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स' काफी खर्चीला होता है और उत्पाद जल्दी खराब होने वाले (perishable) होते हैं।
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या ITC बिना मार्जिन से समझौता किए इस मार्केट में अपनी जगह बना पाती है या नहीं। चूंकि FMCG सेगमेंट कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है, इसलिए लॉजिस्टिक्स में किसी भी तरह की देरी या मिसमैच से होने वाला खर्च कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकता है।
