ITC-Britannia IP Fight: बिस्किट पैकेजिंग पर जंग, FMCG सेक्टर में बढ़ी तकरार

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
ITC-Britannia IP Fight: बिस्किट पैकेजिंग पर जंग, FMCG सेक्टर में बढ़ी तकरार
Overview

ITC Limited ने Britannia Industries के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में कॉपीराइट उल्लंघन (Copyright Infringement) और पासिंग-ऑफ (Passing-off) का मुकदमा दायर किया है। ITC का आरोप है कि Britannia ने अपने नए चीज़-फ्लेवर्ड बिस्किट की पैकेजिंग को ITC के Sunfeast Wowzers लाइन से मिलता-जुलता बनाया है। यह कानूनी कार्रवाई भारतीय FMCG सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और खास पैकेजिंग के महत्व को दर्शाती है।

पैकेजिंग की जंग: ITC का Britannia पर केस!

भारत के तेजी से बढ़ते फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर में इस वक्त एक बड़ी कानूनी लड़ाई छिड़ गई है। ITC Limited ने Britannia Industries के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में कॉपीराइट उल्लंघन और पासिंग-ऑफ का मुकदमा दायर किया है। ITC का कहना है कि Britannia ने हाल ही में लॉन्च किए अपने चीज़-फ्लेवर्ड बिस्किट, 50-50, की पैकेजिंग को ITC के Sunfeast Wowzers चीज़ फ्लेवर बिस्किट की पैकिंग से जानबूझकर कॉपी किया है। यह मामला न सिर्फ दो बड़ी कंपनियों के बीच की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे प्रोडक्ट की पहचान बनाने और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए पैकेजिंग कितनी अहम हो जाती है।

क्या है पूरा मामला?

ITC ने 6 फरवरी, 2026 को हाई कोर्ट में यह केस दाखिल किया। कंपनी का आरोप है कि Britannia के नए बिस्किट की पैकेजिंग का रंग (काला, पीला, नारंगी), टेढ़े-मेढ़े बिस्किट का डिज़ाइन और फॉन्ट स्टाइल (typography) ITC के Sunfeast Wowzers चीज़ फ्लेवर की नकल है, जिसे नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था। ITC का कहना है कि उन्होंने अपने प्रोडक्ट की खास पैकिंग पर काफी पैसा खर्च किया है और इसका ज़बरदस्त मार्केटिंग भी किया है, जिसमें बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान भी शामिल थे। कंपनी के मुताबिक, इस मार्केटिंग के दम पर Wowzers लॉन्च के सिर्फ 12 महीने में ही मार्केट में नंबर 2 पर पहुंच गया था और लगभग ₹51.45 करोड़ की बिक्री की। ITC इस मामले में स्थायी रोक (perpetual injunction) और ₹50 करोड़ हर्जाने की मांग कर रही है। ITC का तर्क है कि Britannia की पैकिंग ग्राहकों को कन्फ्यूज करने के लिए बनाई गई है, खासकर तब जब ग्राहक दुकानों पर तेजी से फैसला लेते हैं। वहीं, Britannia ने ITC के दावों को खारिज किया है और 26 फरवरी, 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने की बात कही है।

शेयर बाजार पर असर?

इस कानूनी लड़ाई के बीच, 6 फरवरी, 2026 को ITC के शेयर में अच्छी तेजी देखी गई। शेयर 5% से ज़्यादा चढ़कर करीब ₹326.35 पर बंद हुआ। जनवरी में सिगरेट पर नए टैक्स के कारण ITC के शेयर करीब 20% गिरे थे, लेकिन इस तेजी को निवेशकों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सिगरेट बनाने वाली कंपनियों ने टैक्स का बोझ ग्राहकों पर डालने में कामयाबी हासिल की, जिसका फायदा Godfrey Phillips India जैसी कंपनियों को भी मिला। इसी दिन, Britannia Industries के शेयर करीब ₹5,911 पर कारोबार कर रहे थे।

बिस्किट मार्केट का रणक्षेत्र

भारतीय बिस्किट मार्केट FMCG सेक्टर का एक बड़ा और लगातार बढ़ता हुआ हिस्सा है। अनुमान है कि 2030 तक इस मार्केट का रेवेन्यू करीब ₹1.65 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। शहरीकरण, लोगों की बढ़ती आमदनी और प्रीमियम व हेल्दी ऑप्शन्स की तरफ रुझान इस ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं। नमकीन बिस्किट (Savory biscuits) इस सेगमेंट में खास ग्रोथ दिखा रहे हैं। ऐसे कॉम्पिटिटिव माहौल में, अपनी अलग पहचान बनाना बहुत ज़रूरी है और पैकेजिंग इसमें एक बड़ा रोल निभाती है। ITC अपने FMCG पोर्टफोलियो को लगातार बढ़ा रहा है। इसके फूड डिवीजन ने फाइनेंशियल ईयर 24 में ₹20,666 करोड़ का ग्रॉस सेल्स दर्ज किया था और यह पहले से ही पैक्ड फूड्स में एक लीडिंग प्लेयर बन चुका है, जिसने बाजार में उपस्थिति के मामले में Britannia और Parle को भी पीछे छोड़ दिया है।

वैल्यूएशन गैप और बाजार की राय

हालांकि, दोनों कंपनियों के वैल्यूएशन में काफी अंतर है। फरवरी 2026 तक, ITC का P/E रेशियो 17.9 से 20.06 के बीच है और इसका मार्केट कैप लगभग ₹4.08 लाख करोड़ है। वहीं, Britannia का P/E रेशियो काफी ज़्यादा, 61.04 से 62.0 है, और इसका मार्केट कैप करीब ₹1.41-1.42 लाख करोड़ है। यह अंतर बताता है कि निवेशक Britannia से ज़्यादा ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं या इसे ITC जैसे डाइवर्सिफाइड ग्रुप के मुकाबले ज़्यादा स्पेशलाइज्ड कंज्यूमर कंपनी मानते हैं। Nestle India (P/E 78.94) और Gopal Snacks (P/E 106.04) जैसी अन्य कंपनियों के हाई मल्टीपल्स यह दिखाते हैं कि भारत में स्थापित कंज्यूमर ब्रांड्स को प्रीमियम वैल्यू दी जाती है।

जनवरी 2026 में FMCG सेक्टर में 7.7% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन सेक्टर 2026 में 'स्ट्रक्चरली ज़्यादा कॉम्पिटिटिव' होने की तैयारी कर रहा है। प्रीमियम बनाने की स्ट्रेटेजी और हेल्थ व वेलनेस ट्रेंड्स बिस्किट कंपनियों के लिए डिमांड बढ़ाने वाले मुख्य कारक हैं।

कानूनी लड़ाई के जोखिम

हालांकि IP (Intellectual Property) लिटिगेशन एक लीगल तरीका है, लेकिन इसमें जोखिम भी जुड़े होते हैं जो कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और स्टॉक वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकते हैं। रिसर्च बताती है कि पेटेंट उल्लंघन के मामलों में, आरोपी कंपनियों को अक्सर फाइलिंग के बाद निगेटिव रिटर्न का सामना करना पड़ता है। निवेशक संभावित जुर्माने, रोक और ब्रांड की इमेज खराब होने जैसी बातों को ध्यान में रखते हैं। ऐसे मुकदमे अनिश्चितता पैदा करते हैं। ITC का यह सख्त कानूनी रुख, जो ब्रांड इक्विटी की रक्षा के लिए है, मैनेजमेंट का ध्यान मुख्य बिजनेस से भटका सकता है या लंबी कानूनी लड़ाई में फंसकर रिसोर्सेज खत्म कर सकता है। इसके अलावा, Britannia का ITC के मुकाबले हाई P/E रेशियो बताता है कि मार्केट पहले से ही इसे प्रीमियम वैल्यू दे रहा है। अगर इस IP डिस्प्यूट में कोई भी निगेटिव खबर आती है, तो इस प्रीमियम वैल्यू का फिर से आकलन हो सकता है, खासकर अगर यह Britannia की नई प्रोडक्ट लॉन्च करने की क्षमता या मार्केट में अपनी रफ्तार बनाए रखने पर असर डाले।

आगे क्या?

ITC के लिए एनालिस्ट्स का मानना है कि यह शेयर अंडरवैल्यूड हो सकता है। कुछ एनालिस्ट्स ने इसके लिए ₹375-₹380 का टारगेट दिया है, जो इसके डाइवर्सिफाइड बिजनेस सेग्मेंट्स पर आधारित है। मार्केट एक्सपर्ट्स ₹340 तक के अपसाइड की भी बात कर रहे हैं, लेकिन स्टॉप-लॉस के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। Britannia के लिए, कंपनी का फोकस अपने प्रीमियम मार्केट पोजीशन और लगातार एक्सपेंशन पर बना हुआ है। हालांकि, चल रहा कानूनी विवाद रेगुलेटरी और कॉम्पिटिटिव रिस्क का एक नया पहलू जोड़ता है, जो शॉर्ट-टर्म में निवेशक सेंटीमेंट और स्टॉक परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है, भले ही FMCG सेक्टर का ओवरऑल आउटलुक पॉजिटिव हो। 26 फरवरी, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें रहेंगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.