IKEA India ने 2030 तक अपने रेवेन्यू को 4 गुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कंपनी अब बड़े स्टोर्स के बजाय 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल पर दांव लगा रही है, ताकि शहरों के बीचों-बीच पहुंचकर ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बनाई जा सके।
रणनीति में बड़ा बदलाव
स्वीडिश रिटेल दिग्गज IKEA अब अपनी पुरानी रणनीति से हटकर काम कर रही है। अब तक कंपनी का पूरा जोर बाहरी इलाकों में बड़े 'बिग-बॉक्स' स्टोर्स पर था, लेकिन अब कंपनी 'हब-एंड-स्पोक' (Hub-and-Spoke) मॉडल अपना रही है। इसके तहत बड़े स्टोर्स के साथ-साथ शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में छोटे और चुस्त स्टोर्स खोले जाएंगे। इसका ताजा उदाहरण बेंगलुरु का 80,000 वर्ग फुट वाला स्टोर है।
फाइनेंशियल सेहत और चुनौतियां
कंपनी के हालिया फाइनेंशियल रिपोर्ट में संघर्ष साफ दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में IKEA India का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,749 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 3.3% कम है। वहीं, कंपनी का घाटा बढ़कर ₹1,325 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹1,299 करोड़ था।
निवेश और भविष्य की राह
इस विस्तार के लिए कंपनी ने ₹21,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश करने का वादा किया है। फिलहाल कंपनी का 30% रेवेन्यू ऑनलाइन सेल्स और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सेगमेंट से आता है। इस पर कंपनी का खास फोकस है ताकि वे केवल फुटफॉल पर निर्भर न रहें।
प्रतिस्पर्धा का मोर्चा
भारतीय बाजार में IKEA का मुकाबला अनऑर्गनाइज्ड प्लेयर्स के साथ-साथ Godrej Interio, Home Centre और Pepperfry जैसे दिग्गजों से है। कंपनी अपनी किचन और फर्नीचर रेंज को स्थानीय विकल्पों से 25-30% सस्ता रखकर बाजार में बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह है कि क्या यह नई रणनीति कंपनी को प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर ला पाएगी या फिर भारी कैपिटल खर्च का बोझ बना रहेगा।
