IKEA India अपने बिजनेस को बड़ा करने के लिए ₹20,000 करोड़ का भारी निवेश करने जा रहा है। कंपनी अब बड़े स्टोर के बजाय छोटे, शहर के बीचों-बीच स्थित स्टोर्स पर फोकस करेगी और लिविंग रूम व बेडरूम के प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाएगी। इसका लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2028 तक मुनाफा कमाना है।
बड़ा दांव, नई रणनीति
IKEA India भारतीय होम फर्निशिंग मार्केट में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए एक बड़ी योजना लेकर आया है। कंपनी ₹20,000 करोड़ का भारी निवेश करने वाली है। इस बार IKEA अपनी पुरानी रणनीति से हटकर, बड़े आउटलेट्स के बजाय शहरों के बीचों-बीच छोटे स्टोर्स खोलने पर जोर देगा। इसका मकसद शहरी ग्राहकों के लिए पहुंच को आसान बनाना है, जो सुविधा को ज्यादा अहमियत देते हैं।
भारतीय घरों के हिसाब से बदलाव
IKEA ने पाया है कि भारत में लोगों की आदतें यूरोप से काफी अलग हैं। जहां ग्लोबल लेवल पर किचन पर ज्यादा फोकस रहता है, वहीं IKEA India अब लिविंग रूम और बेडरूम पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। यह बदलाव इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारतीय घरों में बेडरूम अक्सर 24 घंटे इस्तेमाल होने वाली मल्टी-फंक्शनल जगह होती है। इस प्रोडक्ट मिक्स को बदलने से कंपनी को दिल्ली-NCR और बेंगलुरु जैसे बड़े बाजारों में ग्राहकों से जुड़ने में मदद मिलेगी।
वित्तीय लक्ष्य और लोकल सोर्सिंग
कंपनी का सबसे बड़ा लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2028 तक मुनाफे में आना है। इसके लिए, IKEA अपनी लोकल सोर्सिंग को मौजूदा 30% से बढ़ाकर 50% करने की योजना बना रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, सप्लाई चेन बेहतर होगी और ग्राहकों को कम कीमतों पर सामान मिल सकेगा। फिलहाल, IKEA India सालाना करीब ₹4,000 करोड़ का सामान एक्सपोर्ट करता है, जो इस योजना के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
डिजिटल विस्तार और भविष्य की योजनाएं
फिजिकल स्टोर्स के अलावा, IKEA उन शहरों में भी अपनी ऑनलाइन मौजूदगी बढ़ा रहा है जहां अभी स्टोर नहीं हैं, जैसे चंडीगढ़ और जयपुर। इस डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच से कंपनी नए बाजारों में बड़े निवेश से पहले मांग का पता लगा सकेगी। ₹20,000 करोड़ के इस निवेश में नए डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों का विकास और राजस्थान में एक सोलर पार्क जैसी रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर भी खर्च किया जाएगा।
निवेशकों को इस विस्तार के दौरान आने वाली चुनौतियों, जैसे कि नोएडा और गुरुग्राम जैसे प्रतिस्पर्धी रियल एस्टेट बाजारों में बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने, पर नजर रखनी होगी। छोटे स्टोर फॉर्मेट में यह बदलाव कितना सफल होता है और यह भारी पूंजी खर्च को पूरा कर पाता है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, 2028 तक मुनाफे के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, कंपनी की मार्जिन में सुधार और लोकल सोर्सिंग मॉडल की प्रभावशीलता पर भी नजर रखी जाएगी।
