ICICI Securities का भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भरोसा कायम है। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि अप्रैल-जून 2026 (Q1 FY27) तिमाही में प्रति उपलब्ध कमरा राजस्व (RevPAR) में **8% से 12%** तक की ग्रोथ देखी जा सकती है। बढ़ती कमरे की दरें और बेहतर ऑक्यूपेंसी इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।
क्या है वजह?
ICICI Securities का कहना है कि भारतीय होटल इंडस्ट्री मांग में मजबूत वापसी और बेहतर होटल ऑक्यूपेंसी लेवल से फायदा उठा रही है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून 2026 तक, इंडस्ट्री का रेवेन्यू पर अवेलेबल रूम (RevPAR) पिछले साल की तुलना में 8% से 12% तक बढ़ सकता है।
ग्रोथ के पीछे के फैक्टर्स?
यह पॉजिटिव आउटलुक इंडस्ट्री में रिकवरी के आंकड़ों पर आधारित है। HVS Anarock के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में RevPAR में 20% की सालाना ग्रोथ देखी गई। इस ग्रोथ में दो मुख्य बातें रहीं: एवरेज रूम रेट (ARR) में 10% की बढ़ोतरी और ऑक्यूपेंसी लेवल में 700 बेसिस पॉइंट का सुधार। जब होटल ज्यादा रेट पर कमरे बेच पाते हैं और वे भरे भी रहते हैं, तो बिजनेस के मुनाफे में इजाफा होता है।
निवेशकों के लिए उम्मीदें?
ICICI Securities के मुताबिक, मीडियम टर्म में सेक्टर का प्रदर्शन दो मुख्य बातों पर निर्भर करेगा: प्राइसिंग पावर और कैपेसिटी एक्सपेंशन। ब्रोकरेज का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 से 2029 तक एवरेज रूम रेट्स सालाना 6% से 8% की दर से बढ़ सकते हैं।
हालांकि, सिर्फ रेट बढ़ाना काफी नहीं होगा। ब्रोकरेज का कहना है कि होटल कंपनियों को अपने कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में सालाना 15% से 20% की ग्रोथ हासिल करने के लिए नए एसेट्स जोड़ने और चल रही प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर भी ध्यान देना होगा। यानी, कंपनियों को रेवेन्यू बढ़ाने के लिए एक्सपेंशन पर खर्च करना होगा।
जोखिम और चुनौतियां?
यह आउटलुक पॉजिटिव तो है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी हैं। यह ग्रोथ अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि कोई बड़ी भू-राजनीतिक (geopolitical) टेंशन यात्रा और मांग को प्रभावित न करे। जैसा कि पहले देखा गया है, क्षेत्रीय तनावों के कारण यात्री अपनी यात्राएं रद्द कर सकते हैं, जिसका सीधा असर होटल ऑक्यूपेंसी पर पड़ता है।
इसके अलावा, एग्जीक्यूशन का जोखिम भी है। अनुमानित प्रॉफिट ग्रोथ नए होटलों के जुड़ने पर निर्भर करती है, इसलिए निर्माण में किसी भी तरह की देरी या नई प्रॉपर्टी हासिल करने में मुश्किलों से होटल कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियां हमेशा के लिए कमरे के रेट्स नहीं बढ़ा पाएंगी।
