ग्लोबल ब्रुअर Heineken ने यूके के पब मालिकों को आगाह किया है। वेट-लॉस दवाओं (GLP-1) के बढ़ते चलन से लोग शराब कम पी रहे हैं। डेटा के मुताबिक, इन दवाओं का इस्तेमाल करने वालों का अल्कोहल खर्च **13.5%** कम हो गया है, जो बियर कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म चुनौती है।
बाजार में बड़ा बदलाव
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ब्रुअर कंपनी Heineken ने यूके के हॉस्पिटैलिटी पार्टनर्स को एक स्ट्रक्चरल बदलाव की चेतावनी दी है। कंपनी का कहना है कि Ozempic और Wegovy जैसी GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल से लोगों की पीने की आदतें बदल रही हैं। लोग अब पारंपरिक शराब से दूरी बना रहे हैं, जिसका सीधा असर पब और बार में बिकने वाली बियर की वॉल्यूम पर पड़ रहा है।
डेटा में क्या दिखा?
इंडस्ट्री डेटा प्रोवाइडर Circana की रिसर्च चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक, GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल करने वाले परिवार 2 साल के भीतर अपने मासिक अल्कोहल खर्च में औसतन 13.5% की कटौती कर देते हैं। शराब निर्माताओं के लिए यह वॉल्यूम ग्रोथ के नजरिए से एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि अब लोग हैवी ड्रिंकिंग की जगह मॉडरेट कंजम्पशन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
नई रणनीति की ओर कदम
राजस्व (Revenue) को सुरक्षित रखने के लिए Heineken ने पब मालिकों को अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने की सलाह दी है। कंपनी ने सुझाव दिया है कि वे हाफ-पिनट्स (half-pints) जैसे छोटे सर्विंग साइज पर जोर दें और अपने मेन्यू में नॉन-अल्कोहलिक विकल्पों को विस्तार दें।
पूरी इंडस्ट्री पर दबाव
यह केवल Heineken तक सीमित नहीं है। Diageo और Carlsberg जैसी बड़ी कंपनियों के लिए भी यह एक चिंता का विषय है। हालांकि कुछ कंपनियां अभी इसे मैनेज करने की स्थिति में बता रही हैं, लेकिन ग्लोबल ड्रिंकिंग पैटर्न में आ रहे इस बदलाव ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में इन कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने नॉन-अल्कोहलिक पोर्टफोलियो से पारंपरिक शराब की बिक्री में आने वाली गिरावट को कैसे भरपाई करती हैं।
