HUL Share Price: डिमिर्जर से मुनाफा डबल, पर शेयर **2.1%** टूटा; असली ग्रोथ धीमी?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
HUL Share Price: डिमिर्जर से मुनाफा डबल, पर शेयर **2.1%** टूटा; असली ग्रोथ धीमी?
Overview

Hindustan Unilever (HUL) के निवेशकों के लिए Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट एक डिमिर्जर (Demerger) के चलते **136%** बढ़कर **₹7,075 करोड़** हो गया, लेकिन शेयर **2.1%** की गिरावट के साथ **₹2,410** पर बंद हुआ।

नतीजे: हेडलाइन नंबर vs. असल तस्वीर

Hindustan Unilever (HUL) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में ₹7,075 करोड़ का शानदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 136% की भारी बढ़ोतरी है।

हालांकि, यह बड़ा उछाल मुख्य रूप से आइसक्रीम बिजनेस के डिमिर्जर (Demerger) से मिले ₹4,611 करोड़ के एकमुश्त (one-off) फायदे की वजह से आया है। अगर इस असाधारण आय को हटा दिया जाए, तो कंपनी के जारी संचालन (Continuing Operations) से टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) सिर्फ 1% की मामूली बढ़त के साथ ₹2,570 करोड़ रहा।

इस दौरान, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 5.7% बढ़कर ₹16,441 करोड़ दर्ज किया गया। इससे साफ है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस में वैल्यू-टर्म ग्रोथ धीमी रही। इस विरोधाभास को देखते हुए, बाजार ने HUL के शेयर पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी और यह BSE पर 2.1% की गिरावट के साथ ₹2,410 पर बंद हुआ।

FMCG सेक्टर में रिकवरी, HUL क्यों पिछड़ा?

आम तौर पर, भारतीय फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर में मांग में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, और 2026 में सिंगल-डिजिट की ऊंची वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद है। जीएसटी एडजस्टमेंट, घटती महंगाई और कमोडिटी की स्थिर लागत इसके मुख्य कारण हैं।

लेकिन, HUL का 5.7% रेवेन्यू ग्रोथ कई प्रतिस्पर्धियों से कम रहा। उदाहरण के लिए, Nestle India ने Q3 FY26 में 19% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जबकि ITC का रेवेन्यू 6.7% बढ़ा। HUL की अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ 4% रही, यानी बेची गई यूनिट्स बढ़ीं, लेकिन यह टॉप लाइन (Revenue) पर उतना असर नहीं डाल पाई।

फिलहाल, HUL का पिछला 12 महीनों का P/E रेश्यो (TTM P/E) करीब 54x के आसपास है। यह वैल्यूएशन अपने 10-साल के निचले स्तर के करीब है, लेकिन फिर भी प्रीमियम माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से, पिछले 3 और 5 सालों में HUL के शेयर का प्रदर्शन बेंचमार्क Sensex से पीछे रहा है।

लागत का दबाव और मार्जिन पर असर

HUL एक कर्ज-मुक्त (Debt-free) कंपनी है, लेकिन कंपनी को लगातार लागत में दबाव का सामना करना पड़ रहा है। मैनेजमेंट ने बताया है कि कमजोर होते रुपये और कमोडिटी की अलग-अलग कीमतों के कारण इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में अस्थिरता बनी हुई है।

इसके अलावा, नए लेबर कोड (Labour Codes) लागू होने से ग्रेच्युटी (Gratuity) के लिए ₹110 करोड़ की अतिरिक्त देनदारी (Liability) सामने आई है।

इन सब वजहों से, कंपनी का EBITDA मार्जिन 70 बेसिस पॉइंट (bps) घटकर 23% हो गया है। यह एफएमसीजी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव को दिखाता है।

एनालिस्ट्स की राय और आगे की राह

विश्लेषकों (Analysts) की HUL पर राय मिली-जुली है। आम राय ('Consensus') 'Buy' रेटिंग की है, जिसमें 12 महीने का एवरेज प्राइस टारगेट ₹2,826 रखा गया है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 17% के अपसाइड पोटेंशियल का संकेत देता है।

हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स वैल्यूएशन को लेकर चिंतित हैं और शेयर के हालिया अंडरपरफॉर्मेंस को देखते हुए 'Sell' रेटिंग भी दे रहे हैं।

कंपनी को उम्मीद है कि FY27 में ग्रोथ FY26 से बेहतर रहेगी, लेकिन इनपुट कॉस्ट की अस्थिरता एक बड़ा फैक्टर बनी रहेगी। HUL के लिए भविष्य की परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि वह वॉल्यूम ग्रोथ को मुनाफे में कैसे बदल पाती है और मार्जिन प्रेशर को कितनी अच्छी तरह मैनेज करती है। कंपनी का मार्केट कैप फिलहाल करीब ₹5.78 ट्रिलियन है।

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