Hindustan Unilever (HUL) ने सुस्त रफ्तार को रफ्तार देने के लिए नई 'Winning in New India' स्ट्रैटेजी पेश की है। कंपनी Q1 FY27 में **3%** की प्रॉफिट गिरावट के बाद अब अपना फोकस प्रीमियम स्किनकेयर और ग्रूमिंग सेगमेंट पर शिफ्ट कर रही है और आइसक्रीम बिजनेस को डीमर्ज करने की तैयारी है।
बड़ा रणनीतिक बदलाव
Hindustan Unilever ने हाल ही में अपने 'Capital Markets Day 2026' के दौरान एक बड़े रणनीतिक बदलाव (Strategic Pivot) का ऐलान किया है। पिछले 2 सालों से धीमी ग्रोथ का सामना कर रही कंपनी अब अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर नए 'Winning in New India' रोडमैप पर आगे बढ़ेगी। इसका मकसद प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करना और भारत के बदलते कंज्यूमर लैंडस्केप का फायदा उठाना है।
नतीजों का हाल और दबाव
Q1 FY27 के नतीजों में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹2,673 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 3% की गिरावट दिखाता है, जबकि रेवेन्यू बढ़कर ₹17,341 करोड़ पर पहुंच गया। यह गिरावट बाजार में बढ़ते नए और छोटे कॉम्पिटिटर्स से मिल रही कड़ी टक्कर को दर्शाती है।
भविष्य की योजनाएं
कंपनी ने अपनी कैपेक्स (Capex) यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर को सालाना टर्नओवर के 2% से बढ़ाकर 3% करने का फैसला किया है। इसके मुख्य बिंदु हैं:
- आइसक्रीम बिजनेस: कंपनी अपने आइसक्रीम कारोबार को अलग (Demerger) करेगी, ताकि मेल ग्रूमिंग और प्रीमियम स्किनकेयर जैसे हाई-ग्रोथ सेगमेंट्स पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके।
- AI और टेक्नोलॉजी: ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा।
- मार्केट शेयर की जंग: साल 2020 से 2025 के बीच एफएमसीजी (FMCG) मार्केट में 11,000 से ज्यादा नए ब्रांड्स आए हैं, जिससे मार्केट शेयर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने मार्जिन को 22-24% की रेंज में कैसे बरकरार रखती है और रूरल डिमांड में रिकवरी कब तक देखने को मिलती है।
