Hindustan Unilever (HUL) और Dabur India ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में अपने परमानेंट कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इंडस्ट्री में बाकी कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ा रही हैं। यह FMCG सेक्टर में ऑटोमेशन और डिजिटल एफिशिएंसी की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन ऑपरेशन्स में बदलाव आ रहा है।
बड़ी कंपनियों में छंटनी का दौर
भारतीय फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर में कर्मचारियों की रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बड़ी कंपनियां परमानेंट स्टाफ को कम कर रही हैं, जबकि इंडस्ट्री में औसत सैलरी बढ़ रही है। 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के आंकड़ों के अनुसार, Hindustan Unilever (HUL) और Dabur India जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने परमानेंट कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।
HUL और Dabur में कितने कम हुए कर्मचारी?
Hindustan Unilever ने 31 मार्च, 2026 तक अपने परमानेंट कर्मचारियों की संख्या 5,898 बताई है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 6,604 से कम है। इसी दौरान, कंपनी ने FY26 में कर्मचारियों की औसत सैलरी में 6.08% की बढ़ोतरी दर्ज की। हालांकि, यह बढ़ोतरी FY25 के 8.39% की तुलना में कम थी। दूसरी ओर, Dabur India ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में 4,770 परमानेंट कर्मचारियों के साथ समापन किया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 5,343 था। Dabur ने FY26 में औसत सैलरी में 7.7% का इजाफा किया, जो FY25 के 6% से ज्यादा है।
ऑटोमेशन बना स्ट्रैटेजिक वजह
परमानेंट वर्कफोर्स में कमी का मुख्य कारण ऑटोमेशन (Automation) पर बढ़ा हुआ कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) है। कंपनियां अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और सप्लाई चेन में AI-संचालित एनालिटिक्स, ऑटोमेटेड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सिस्टम को तेजी से अपना रही हैं। डिजिटल टूल्स का उपयोग करके रूटीन ऑपरेशन्स को संभालने से कंपनियों का लक्ष्य प्रोडक्शन एफिशिएंसी (Production Efficiency) बढ़ाना है। शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए, यह कदम लेबर कॉस्ट (Labor Cost) बढ़ने और FMCG मार्केट में बढ़ते कंपटीशन के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) को बनाए रखने या सुधारने की एक स्ट्रैटेजिक कोशिश है।
कुछ कंपनियों की अलग रणनीति
FMCG सेक्टर की सभी कंपनियां एक ही राह पर नहीं चल रही हैं। HUL और Dabur के स्टाफ कम करने के उलट, कुछ अन्य कंपनियों ने अलग रुख अपनाया है। Tata Consumer Products Limited (TCPL) ने अपने परमानेंट वर्कफोर्स को पिछले साल के 4,079 से बढ़ाकर 4,558 कर दिया। TCPL ने औसत सैलरी ग्रोथ में 12.1% की बढ़ोतरी के साथ सेक्टर में सबसे आगे रहा। Marico ने भी अपने परमानेंट कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 1,983 कर ली, जबकि Nestle India ने अपने कुल कर्मचारियों की संख्या 8,680 पर स्थिर रखी।
यह जानकारी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत दी गई है, जिसके तहत लिस्टेड कंपनियों को अपने कर्मचारी रेमुनरेशन (Remuneration) और हेडकाउंट (Headcount) में बदलाव का विवरण देना अनिवार्य है। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि ऑटोमेशन की यह पहल लगातार मार्जिन विस्तार (Margin Expansion) में तब्दील होती है या नहीं, या फिर कंपनियां डिजिटल प्रक्रियाओं और छोटी परमानेंट टीमों पर अधिक निर्भरता के कारण ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (Operational Flexibility) बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करती हैं।
