लग्जरी ब्रांड Gucci ने अब अपने कुछ स्नीकर मॉडल की मैन्युफैक्चरिंग इटली से शिफ्ट करके चीन में शुरू कर दी है। पेरेंट कंपनी Kering लागत घटाने की कोशिश में है, लेकिन निवेशकों को डर है कि इससे ब्रांड की प्रीमियम इमेज और प्राइसिंग पावर पर असर पड़ सकता है।
लग्जरी फैशन की दुनिया में यह एक बड़ा बदलाव है। Gucci ने अपने कुछ खास स्नीकर मॉडल का प्रोडक्शन इटली के बजाय चीन में शिफ्ट कर दिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब कंपनी की पेरेंट कंपनी Kering लगातार 3 साल से गिरती बिक्री के संकट से जूझ रही है। यूरोप में इन स्नीकर्स की कीमत लगभग €800 और अमेरिका में $1,000 के आसपास है।\n\n### मार्जिन और ब्रांड प्रेस्टीज के बीच जंग\nलग्जरी गुड्स मार्केट में 'मेड इन इटली' या 'मेड इन फ्रांस' का लेबल ही हाई प्राइसिंग की मुख्य वजह होता है। Kering का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग को चीन ले जाने से सप्लाई चेन को बेहतर बनाने और प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि, Barclays जैसे एनालिस्ट्स ने इसे लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि चीन में हालिया प्राइस कट और मैन्युफैक्चरिंग का यह बदलाव शॉर्ट-टर्म वॉल्यूम को तो बचा सकता है, लेकिन लंबे समय में ब्रांड की वैल्यू को नुकसान पहुंचा सकता है।\n\n### निवेशकों के सामने बड़ी चुनौती\nनिवेशक अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या यह रणनीति कंपनी को स्थिर कर पाएगी या यह ब्रांड की एक्सक्लूसिविटी को खत्म कर देगी। अगर ग्राहक इसे क्वालिटी या लक्जरी में कमी के रूप में देखते हैं, तो कंपनी के लिए अपने प्रीमियम दाम बरकरार रखना मुश्किल हो सकता है।\n\n### आगे क्या देखना होगा?\nशेयरधारकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि क्या लागत में कटौती का यह फैसला कंपनी के नेट प्रॉफिट में सुधार लाता है। आने वाली तिमाही के नतीजों में सेल्स डेटा और प्रॉफिट मार्जिन पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी, जिससे यह साफ होगा कि क्या Gucci अपनी ऐतिहासिक पहचान बचाते हुए नई चुनौतियों का सामना कर पाएगी या उसे वॉल्यूम के खेल में उलझना पड़ेगा।
