कोर्ट का बड़ा फैसला: Godrej Consumer Products को मिली राहत
Calcutta High Court की डिवीजन बेंच ने Godrej Consumer Products (GCPL) के 'Spic' टॉयलेट क्लीनर बॉटल के इस्तेमाल पर लगी रोक को हटा दिया है। यह फैसला Reckitt Benckiser India (Harpic की निर्माता) के साथ चल रहे कानूनी विवाद में Godrej के लिए एक अहम जीत है। कोर्ट ने विशेष रूप से बॉटल के आकार के आधार पर ट्रेडमार्क उल्लंघन के Reckitt के दावे पर सवाल उठाए, खासकर जब डिजाइन सुरक्षा की अवधि समाप्त हो चुकी थी।
फैसले की जड़ें: जजों ने क्यों उठाए सवाल?
जस्टिस राजशेखर मन्थ्रा और जस्टिस Md. शब्बर रशीदी की बेंच ने माना कि Reckitt Benckiser ने अंतरिम राहत के लिए 'Harpic बॉटल और कैप' डिवाइस मार्क पर कोई मजबूत 'प्राइमा फेसी' (prima facie) मामला नहीं बनाया था। कोर्ट ने सिंगल जज के आदेश को इन परिस्थितियों में अनुचित पाया। अहम बात यह है कि Godrej ने जिन विज्ञापनों पर आपत्ति जताई थी, उन्हें बंद करने का आश्वासन पहले ही दे दिया था, जिसे डिवीजन बेंच ने पर्याप्त माना। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि Reckitt की तात्कालिकता (urgency) का दावा कमजोर था और Godrej को किसी भी तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश से पहले अपना बचाव पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए था।
बाज़ार की प्रतिक्रिया और वित्तीय पहलू
इस खबर का असर शुक्रवार को Godrej Consumer Products के शेयरों पर भी देखा गया। स्टॉक लगभग ₹1800 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, और वॉल्यूम 1.5 मिलियन शेयरों का रहा, जो कि कानूनी बाधा दूर होने का संकेत देता है। Godrej Consumer Products का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹75,000 करोड़ है, और विश्लेषकों का इसके लिए टारगेट प्राइस अक्सर ₹2000 के आसपास रहता है। वहीं, £35 बिलियन वैल्यू वाली Reckitt Benckiser अपनी आक्रामक बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) रक्षा के लिए जानी जाती है।
ट्रेडमार्क, डिज़ाइन और बाज़ार की चालें
डिवीजन बेंच ने Reckitt के दावे की बुनियाद पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट का मानना था कि केवल बॉटल के आकार के आधार पर ट्रेडमार्क अधिकारों को लागू करना मुश्किल है। बेंच ने जोर देकर कहा कि पंजीकृत चिह्नों (registered marks) को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए और डिज़ाइन सुरक्षा की अवधि समाप्त होने के बाद ट्रेडमार्क कानून का इस्तेमाल अप्रत्यक्ष रूप से इसे पुनर्जीवित करने के प्रयास को 'पूरी तरह संदिग्ध' बताया। यह न्यायिक रुख FMCG कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है। भारतीय FMCG सेक्टर लगातार 10-12% CAGR की दर से बढ़ रहा है, लेकिन इनपुट लागत में वृद्धि सभी खिलाड़ियों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
आगे क्या? और IP पर बहस
हालांकि Godrej Consumer Products को तत्काल कानूनी जीत मिली है, लेकिन इस फैसले के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। कोर्ट का बॉटल के आकार पर आधारित ट्रेडमार्क दावों के प्रति संशय, खासकर जब डिज़ाइन पेटेंट समाप्त हो गए हों, यह संकेत दे सकता है कि पैकेजिंग तत्वों के लिए IP प्रवर्तन थोड़ा और सख्त हो सकता है। Reckitt Benckiser के लिए, जिसकी कानूनी रणनीति को अपील बेंच ने आक्रामक और प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण माना, यह हार इस बात पर प्रकाश डालती है कि मजबूत 'प्राइमा फेसी' मामले के बिना अंतरिम इंजेक्शन पर भरोसा करने का जोखिम क्या है। अदालत की टिप्पणियां कि ट्रेडमार्क उल्लंघन के दावे 'बाद का विचार' हो सकते हैं, प्रतिद्वंद्वियों को फायदा पहुंचा सकते हैं।
अंतिम निष्कर्ष
डिवीजन बेंच ने पार्टियों को सिंगल-जज के सामने पूरी सुनवाई के लिए अपने दस्तावेज़ (pleadings) दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हालांकि, रोक हटने से Godrej Consumer Products को अपने 'Spic' टॉयलेट क्लीनर को डिजाइन के अनुसार मार्केटिंग करने में महत्वपूर्ण परिचालन स्वतंत्रता मिली है, जिससे तत्काल कानूनी बाधा दूर हो गई है। यह निर्णय भारत में आकार-आधारित ट्रेडमार्क दावों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
