Godrej Consumer: नए CEO आसीफ मलबारी का बड़ा 'ऑपरेशनल रिसेट', मार्जिन पर पड़ेगा दबाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Godrej Consumer: नए CEO आसीफ मलबारी का बड़ा 'ऑपरेशनल रिसेट', मार्जिन पर पड़ेगा दबाव

Godrej Consumer Products के नए CEO आसीफ मलबारी ने कंपनी के लिए नई रणनीति का ऐलान किया है। इसके तहत डिस्ट्रिब्यूटर इन्वेंट्री को **20 दिन** से घटाकर **10 दिन** करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका असर शॉर्ट टर्म में मुनाफे पर पड़ेगा।

अपनी नई भूमिका संभालने के बाद पहली बार निवेशकों से मुखातिब होते हुए, Godrej Consumer Products Limited (GCPL) के CEO आसीफ मलबारी ने भविष्य की दिशा तय कर दी है। कंपनी अब आक्रामक विस्तार के बजाय 'ऑपरेशनल एफिशिएंसी' और बेहतर निष्पादन (Execution) पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करेगी।

इन्वेंट्री क्लीनअप से मार्जिन पर असर

कंपनी के डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क में अभी 20 दिन की स्टॉक होल्डिंग है, जिसे घटाकर 10 दिन के लक्ष्य तक लाने की योजना है। इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी को अगले तीन क्वार्टर तक काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। इस दौरान कंपनी ने अनुमान जताया है कि मार्जिन पर ₹125 करोड़ से ₹150 करोड़ का अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

R&D और निवेश का रोडमैप

इन्वेंट्री सुधार के साथ-साथ, कंपनी इनोवेशन पर भी दांव लगा रही है। GCPL एक नई R&D फैसिलिटी के लिए ₹150 करोड़ का निवेश करेगी। साथ ही, डिजिटल मार्केटिंग पर खर्च बढ़ाने की भी योजना है। इन दोनों पहलों से सालाना ऑपरेटिंग खर्च में करीब ₹200 करोड़ की बढ़ोतरी होगी। मैनेजमेंट ने साफ किया है कि इन निवेशों का फायदा दिखने में 2 से 3 साल का समय लग सकता है, यानी कंपनी अभी शॉर्ट टर्म मुनाफे के बजाय लॉन्ग टर्म ग्रोथ की नींव रख रही है।

Raymond Consumer Care के सबक

CEO ने माना कि Raymond Consumer Care के एकीकरण के दौरान कुछ चुनौतियां रहीं। डियोड्रेंट और फ्रेगरेंस सेगमेंट में उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। अब कंपनी का फोकस नई खरीदारी के बजाय मौजूद बिजनेस को और अधिक प्रॉफिटेबल बनाने पर है।

हालिया परफॉर्मेंस पर एक नजर

FY27 की पहली तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा था। रेवेन्यू 18% बढ़कर ₹4,225 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट में 11.5% का उछाल दर्ज किया गया, जो ₹505 करोड़ पहुंच गया। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के मालनपुर में ₹480 करोड़ की लागत से एक ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी शुरू की गई है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने मार्जिन को मैनेज करते हुए इन्वेंट्री के लक्ष्य को कैसे हासिल करती है।

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