चीन और यूरोप के बाजारों में सुस्ती के बाद अब बड़ी मल्टीनेशनल FMCG कंपनियां भारत पर दांव लगा रही हैं। हालांकि भारत में वॉल्यूम और रेवेन्यू बढ़ रहा है, लेकिन बढ़ती महंगाई और कमोडिटी की कीमतों का असर मुनाफे पर पड़ सकता है।
दुनिया की दिग्गज FMCG कंपनियां अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं। चीन और यूरोप के बाजारों में विकास की रफ्तार थमने के बाद अब इन कंपनियों के रडार पर भारत है। Unilever, Nestlé, और Mondelēz जैसी कंपनियां अब भारत में बड़ी मात्रा में कैपिटल और मैन्युफैक्चरिंग हब पर फोकस बढ़ा रही हैं।
भारत क्यों है कंपनियों की पहली पसंद?
भारत में कंपनियों को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर, Hindustan Unilever (HUL) ने सितंबर 2026 की तिमाही में 7% की अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की है, जो पिछले 21 तिमाहियों में सबसे बेहतर प्रदर्शन है। इस तेजी के पीछे क्विक-कॉमर्स (Quick-commerce) और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का बड़ा हाथ है।
रिस्क फैक्टर: क्या मुनाफा रहेगा सुरक्षित?
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मैक्रो-इकोनॉमिक है। भारत की रिटेल महंगाई 22 महीने के उच्च स्तर 5.54% पर पहुंच गई है। पाम ऑयल, चीनी और पैकेजिंग मैटेरियल की बढ़ती लागत कंपनियों के मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव बना रही है।
यदि इन बढ़ती लागतों को ग्राहकों पर डाला गया, तो मांग कम होने का डर है। इसके अलावा, D2C ब्रांड्स की ओर से मिल रही कड़ी टक्कर भी बड़ी कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मार्जिन प्रोटेक्शन प्लान और रॉ-मैटेरियल की कीमतों पर नजर रखनी चाहिए।
