P&G और Nestlé जैसी दिग्गज कंपनियों ने बढ़ते लॉजिस्टिक और एनर्जी खर्चों के चलते प्रोडक्ट महंगे करने का संकेत दिया है। क्या ये कंपनियां सेल्स वॉल्यूम बरकरार रख पाएंगी?
ग्लोबल कंज्यूमर गुड्स कंपनियां एक कठिन दौर से गुजर रही हैं। कई प्रमुख दिग्गजों ने इशारा किया है कि साल 2027 तक आम इस्तेमाल की चीजों के दाम बढ़ने का सिलसिला जारी रह सकता है। जियो-पॉलिटिकल तनाव, खासकर US-Iran के हालातों के चलते लॉजिस्टिक और एनर्जी की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर भारी दबाव है।
प्राइसिंग स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव
सिर्फ कीमतें बढ़ाकर खर्च निकालना अब कंपनियों के लिए मुश्किल हो रहा है। Procter & Gamble ने हाल ही में अपने आउटलुक में बदलाव किया है। कंपनी को कच्चे माल और एनर्जी की बढ़ती कीमतों से $1 बिलियन के बजाय अब $1.4 बिलियन के नुकसान का अनुमान है। यह आंकड़ा बताता है कि मुनाफा बचाने के लिए केवल दाम बढ़ाना अब कारगर नहीं है।
वॉल्यूम ग्रोथ की जंग
इंडस्ट्री के दिग्गज अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। Nestlé ने देखा है कि वॉल्यूम ग्रोथ अब प्राइसिंग ग्रोथ से आगे निकलने लगी है, जो दिखाता है कि ग्राहक अब महंगी चीजों के बजाय ज्यादा सामान खरीदने पर जोर दे रहे हैं। इसके उलट, Reckitt (Durex की निर्माता कंपनी) ने अपना सालाना रेवेन्यू फोरकास्ट घटा दिया है, जिसके बाद उनके शेयर में 5% की गिरावट देखी गई।
निवेशकों के लिए जोखिम
इस सेक्टर में सबसे बड़ा रिस्क ग्राहकों का मोहभंग होना है। जब ब्रांडेड सामान बहुत महंगे हो जाते हैं, तो ग्राहक सस्ते 'प्राइवेट-लेबल' (स्टोर ब्रांड) विकल्पों पर शिफ्ट हो जाते हैं। PepsiCo भी सेल्स सुधारने के लिए कभी कीमतें कम तो कभी ज्यादा करने की कोशिश कर रही है, जो साबित करता है कि मार्जिन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या ये कंपनियां वॉल्यूम रिकवरी कर पाती हैं या नहीं।
