भारत के एफएमसीजी (FMCG) बाजार की तस्वीर तेजी से बदल रही है। डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स ने किराना स्टोर मार्केट में अपनी हिस्सेदारी को पिछले साल के **14.8%** से बढ़ाकर अब **21.7%** तक पहुंचा दिया है।
भारतीय कंज्यूमर गुड्स मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही (H1 FY27) के डेटा के मुताबिक, नई उम्र के 'डिजिटल-फर्स्ट' ब्रांड्स अब ग्राहकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। इसका सीधा असर Hindustan Unilever, ITC और Nestlé जैसी पुरानी दिग्गज कंपनियों के ट्रेडिशनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर पड़ रहा है।
ग्राहकों की पसंद में बदलाव
आज का ग्राहक प्रीमियम और साइंस-बेस्ड (विज्ञान-आधारित) प्रोडक्ट्स की ओर झुकाव रख रहा है। ये नए ब्रांड्स सबसे पहले क्विक-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए शहरी ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाते हैं और फिर किराना स्टोर्स में एंट्री करते हैं। डिमांड इतनी अधिक है कि दुकानदारों को अब अपनी सीमित शेल्फ स्पेस में इन नए प्रोडक्ट्स को जगह देनी ही पड़ रही है।
दिग्गजों की रणनीति: 'खरीदो और बढ़ो'
बड़ी कंपनियां अब हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी हैं। HUL, Marico और ITC जैसी कंपनियां तेजी से इन उभरते हुए स्टार्टअप्स को खरीद रही हैं। Yoga Bar, Plix या Minimalist जैसे ब्रांड्स का अधिग्रहण इसी रणनीति का हिस्सा है। मकसद साफ है—प्रतिस्पर्धा को खत्म करना और युवा, प्रीमियम कंज्यूमर्स तक अपनी पहुंच बनाना।
फिजिकल स्केलिंग की चुनौती
हालांकि, ऑनलाइन से ऑफलाइन (किराना) तक का सफर स्टार्टअप्स के लिए आसान नहीं है। पूरे देश में सप्लाय चेन और इन्वेंट्री का खर्च बहुत ज्यादा है। वहीं, दिग्गज कंपनियां भी अब अपने रिटेल ऑर्डरिंग सिस्टम को डिजिटाइज कर रही हैं ताकि उनकी पकड़ बनी रहे। आने वाले समय में बाजार में वही टिकेगा जो पुरानी फिजिकल ताकत और नई डेटा-ड्रिवन चुस्ती का सही तालमेल बिठा पाएगा।
