GOPIZZA India ने 2029-30 तक अपने सभी ब्रांड्स में 500 आउटलेट का नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रखा है, जो इसके संभावित IPO के लिए अहम होगा। कंपनी केरल और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त ₹50 करोड़ का निवेश करेगी, और मॉल व एयरपोर्ट जैसे हाई-फुटफॉल वाले इलाकों पर फोकस करेगी।
GOPIZZA India का बड़ा विस्तार प्लान
GOPIZZA India अपनी विस्तार योजना को तेज़ कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ सालों में अपने पोर्टफोलियो के सभी ब्रांड्स, जिनमें GOPIZZA, Gochujang और Dalcomi शामिल हैं, में 500 आउटलेट तक पहुंचना है। इस ग्रोथ को फंड करने के लिए, कंपनी ने ₹50 करोड़ के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की है। इस फंड का इस्तेमाल 2029-30 फाइनेंशियल ईयर में संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से पहले अपने कोरियन-थीम वाले फ़ूड बिज़नेस को बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
केरल में एंट्री और हाई-ट्रैफिक हब पर फोकस
कंपनी अगले महीने केरल में अपना पहला आउटलेट खोलने जा रही है, जिसकी शुरुआत कोच्चि के लुलु मॉल से होगी। इसके बाद तिरुवनंतपुरम और कोझिकोड में भी विस्तार किया जाएगा। साथ ही, दिसंबर में कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी एक आउटलेट खुलने की उम्मीद है। कंपनी का यह कदम हाई-ट्रैफिक लोकेशन पर ज़ोर दे रहा है, जिससे मैनेजमेंट का मानना है कि ग्राहकों को स्वाभाविक रूप से आकर्षित किया जा सकेगा और मार्केटिंग पर ज़्यादा खर्च करने की ज़रूरत कम होगी।
पिज़्ज़ा से आगे बढ़कर कोरियन फ़ूड प्लेटफॉर्म
जहां GOPIZZA ब्रांड फिलहाल कंपनी की कुल बिक्री का लगभग 80% योगदान देता है, वहीं कंपनी अब एक व्यापक कोरियन फ़ूड प्लेटफॉर्म बनने की ओर बढ़ रही है। Gochujang स्ट्रीट फ़ूड चेन, जो अभी बिक्री का करीब 14% हिस्सा है, तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। कंपनी ने पहले ही हैदराबाद में 10 स्टोर खोले हैं, जहां कोरियन स्ट्रीट फ़ूड प्रोडक्ट्स की लगातार मांग देखी जा रही है। विभिन्न ब्रांड्स की एक विस्तृत रेंज पेश करके और फैशन और स्किनकेयर जैसे लाइफस्टाइल सेगमेंट में संभावित एंट्री का पता लगाकर, कंपनी अपने मुख्य पिज़्ज़ा बिज़नेस पर निर्भरता कम करना चाहती है।
क्षेत्रीय रणनीति और भविष्य की ग्रोथ
कंपनी का मुख्य फोकस दक्षिणी भारत पर है, जिसमें हैदराबाद और चेन्नई ग्रोथ के प्रमुख इंजन के तौर पर काम कर रहे हैं। दक्षिण के बाहर, कंपनी की योजना पुणे, अहमदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में विस्तार करने की है। कंपनी ने रियल एस्टेट के मामले में एक सेलेक्टिव अप्रोच अपनाया है और फिलहाल मुंबई जैसे हाई-कॉस्ट वाले मार्केट्स में एंट्री को टाल रही है। ग्रोथ को प्रॉफिटेबिलिटी के साथ संतुलित करने के लिए, मैनेजमेंट कुछ क्षेत्रों में मास्टर फ्रेंचाइजी पार्टनरशिप का मूल्यांकन कर रहा है ताकि ब्रांड की कंसिस्टेंसी बनी रहे और नए आउटलेट की लॉन्चिंग तेज़ी से हो सके। निवेशकों को इन आउटलेट की ओपनिंग, कैपिटल स्पेंडिंग के मैनेजमेंट और 2030 के लक्ष्य तक पहुंचने के साथ-साथ प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए।
