GM Breweries ने Q2 FY27 के नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **19.9%** बढ़कर **₹860.62 करोड़** हो गया है, जबकि नेट प्रॉफिट में **12.6%** का इजाफा दर्ज हुआ है। इसके बावजूद शेयर में **5%** से ज्यादा की गिरावट आई है, जिसकी मुख्य वजह कंपनी के घटते प्रॉफिट मार्जिन (Margin) को माना जा रहा है।
GM Breweries ने 8 अक्टूबर, 2026 को फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए। इन नतीजों में एक तरफ जहाँ कंपनी के कारोबार में ग्रोथ दिखी, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती लागत ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। कंपनी का रेवेन्यू 19.9% बढ़कर ₹860.62 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट 12.61% की वृद्धि के साथ ₹39.29 करोड़ दर्ज किया गया।
मार्जिन पर दबाव का असर
नतीजों के बाद शेयर बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही और इंट्राडे में स्टॉक 5% से 7% तक गिर गया। निवेशकों की नाराजगी का मुख्य कारण EBITDA मार्जिन में आई गिरावट है। मार्जिन लगभग 23.4% तक सिमट गया है, जो सालाना आधार पर 142 बेसिस पॉइंट्स की कमी दिखाता है। इसका साफ मतलब है कि कंपनी को बिक्री बढ़ाने के लिए पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, जिससे मुनाफा प्रभावित हो रहा है।
क्यों बढ़ रही है लागत की चुनौती?
कंपनी को कच्चे माल, जैसे कि मोलासेस (Molasses) और एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर असर पड़ने और मोलासेस के महंगे होने का खतरा है।
इसके साथ ही, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऊंची होने के चलते PET बोतलों की पैकिंग लागत भी बढ़ गई है। चूँकि शराब उद्योग काफी नियंत्रित है, इसलिए कंपनी आसानी से ग्राहकों पर कीमतों का बोझ नहीं डाल सकती। हालांकि, राहत की बात यह है कि कंपनी का बैलेंस शीट डेब्ट-फ्री (debt-free) है, जो मुश्किल दौर में भी एक स्थिरता प्रदान करता है। आने वाले समय में कंपनी लागत को कैसे नियंत्रित करती है, यही निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण फोकस होगा।
