International Flavors & Fragrances (IFF) की नई स्टडी के मुताबिक, भारत में GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग अपनी डाइट तो कम कर रहे हैं, लेकिन घरों में स्नैक्स की खरीद जस की तस बनी हुई है।
International Flavors & Fragrances (IFF) की ताजा रिपोर्ट 'Inside the India GLP-1 Consumer Journey' ने भारतीय बाजार में एक बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में किए गए इस सर्वे के अनुसार, जो लोग वजन कम करने के लिए GLP-1 दवाओं का सहारा ले रहे हैं, वे अब चावल और चपाती जैसे मुख्य आहार की मात्रा काफी कम कर चुके हैं।
स्नैक्स की डिमांड में स्थिरता का रहस्य
दिलचस्प बात यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर खुराक कम होने के बावजूद, परिवारों की ग्रोसरी लिस्ट में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। बिस्कुट, मिठाई और फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री पहले की तरह जारी है। इसकी मुख्य वजह यह है कि परिवार के बाकी सदस्य वही पुराना डाइट फॉलो कर रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए स्नैक्स की डिमांड में ज्यादा असर नहीं दिख रहा है।
हेल्थ और न्यूट्रिशन पर बढ़ा फोकस
स्टडी का दावा है कि 90% रिस्पोंडेंट्स के स्वाद और भोजन को लेकर नजरिए में बदलाव आया है। अब लोग आसानी से पचने वाले और नरम फूड ऑप्शंस को प्राथमिकता दे रहे हैं। इतना ही नहीं, 74% कंज्यूमर्स अब खाने के पैकेट पर 'लेबल्स' को बारीकी से पढ़ रहे हैं। यह बदलाव FMCG कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत है कि उन्हें अपने प्रॉडक्ट पोर्टफोलियो में हाई-प्रोटीन और फाइबर युक्त 'हेल्थ-फोकस्ड' विकल्पों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि यह बदलाव रातों-रात नहीं आने वाला। भारत जैसे 'प्राइस-सेंसिटिव' बाजार में टेस्ट और कीमत अब भी बड़े फैक्टर हैं। इसके अलावा, दवाओं का 'स्टार्ट-स्टॉप' पैटर्न कंपनियों के लिए इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मुश्किल बना सकता है। भविष्य में वही कंपनियां मुनाफे में रहेंगी जो स्वाद और सेहत के बीच सही तालमेल बिठाकर नए प्रोडक्ट्स मार्केट में ला सकेंगी।
