FSSAI के कड़े नियमों से मचा हड़कंप: Nestle और Britannia ने बदले अपने प्रोडक्ट्स के फॉर्मूले

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FSSAI के कड़े नियमों से मचा हड़कंप: Nestle और Britannia ने बदले अपने प्रोडक्ट्स के फॉर्मूले

FSSAI के संभावित 'रेड हेक्सागोनल' वार्निंग लेबल से बचने के लिए Nestle और Britannia जैसी फूड कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स से शुगर, सॉल्ट और फैट कम कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद, कंपनियां ब्रांड वैल्यू बचाने की होड़ में जुट गई हैं।

भारत की दिग्गज पैक्ड फूड कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के 'रेसिपी बुक' को तेजी से अपडेट कर रही हैं। यह कवायद FSSAI के उन प्रस्तावित नियमों के चलते हो रही है, जिनमें हाई शुगर, साल्ट और सैचुरेटेड फैट वाले प्रोडक्ट्स पर अनिवार्य रूप से 'रेड हेक्सागोनल' वार्निंग लेबल लगाने की बात कही गई है। अगर ये नियम लागू होते हैं, तो FMCG सेक्टर में ब्रांड इमेज और सेल्स पर बड़ा असर पड़ सकता है।

कॉरपोरेट रणनीति और R&D की चुनौती

Nestlé India और Britannia Industries जैसी बड़ी कंपनियां कानून के लागू होने का इंतजार किए बिना ही अपने फॉर्मूलेशन बदल रही हैं। किसी भी एक प्रोडक्ट की रेसिपी बदलने में आमतौर पर 6 से 8 महीने का वक्त लगता है, क्योंकि कंपनी को सेहत के साथ-साथ स्वाद और टेक्सचर का संतुलन भी बनाना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट की नज़र

यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट ने रेगुलेटर से इन वार्निंग लेबल्स के वैज्ञानिक आधार और समय-सीमा पर स्पष्ट रोडमैप मांगा है। इस पूरे घटनाक्रम पर अगली बड़ी सुनवाई 28 सितंबर, 2026 को होनी है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है।

मार्जिन पर क्या होगा असर?

निवेशकों के लिए मुख्य चिंता प्रॉफिटेबिलिटी है। नई रेसिपी तैयार करने में R&D पर भारी खर्च हो रहा है, साथ ही सप्लाई चेन और पैकेजिंग लाइन्स को दोबारा कॉन्फ़िगर करना पड़ रहा है। हालांकि, Britannia जैसी कंपनियां पहले ही 2019 के मुकाबले शुगर और सोडियम के स्तर में कमी का दावा कर चुकी हैं। अब देखने वाली बात यह है कि क्या कंपनियां इन बढ़ती लागतों को अपने मार्जिन को प्रभावित किए बिना सोख पाएंगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.