Flipkart का फूड डिलीवरी में कदम! अगले 30 दिनों में बेंगलुरु में शुरू होगी सर्विस

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AuthorNeha Patil|Published at:
Flipkart का फूड डिलीवरी में कदम! अगले 30 दिनों में बेंगलुरु में शुरू होगी सर्विस

ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart जल्द ही फूड डिलीवरी सेक्टर में एंट्री करने जा रही है। कंपनी अगले 30 दिनों में बेंगलुरु में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च करेगी, जो Swiggy और Zomato जैसे बड़े प्लेयर्स को टक्कर देगा।

Detailed Coverage

लॉजिस्टिक्स में बड़ा कदम

Flipkart ग्रुप के CEO कल्याण कृष्णमूर्ति ने पुष्टि की है कि कंपनी फूड डिलीवरी मार्केट में उतरने की तैयारी में है। इसके तहत, बेंगलुरु में अगले 30 दिनों के अंदर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। यह कदम Walmart के स्वामित्व वाली इस रिटेलर के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जिसने पिछले दशक में किताबें और इलेक्ट्रॉनिक्स से आगे बढ़कर ट्रैवल सर्विसेस और ग्रोसरी तक अपना विस्तार किया है।

ONDC का हो सकता है इस्तेमाल

Flipkart इस सर्विस को लॉन्च करने के लिए दो मुख्य तरीकों पर विचार कर रही है: या तो एक अलग ऐप के जरिए या फिर सरकार समर्थित ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) प्लेटफॉर्म के साथ सीधे इंटीग्रेशन करके। ONDC का इस्तेमाल करने से Flipkart को नए सिरे से लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की बजाय रेस्तरां और डिलीवरी पार्टनर्स के एक बड़े नेटवर्क का फायदा मिल सकता है। कंपनी ने पहले भी इस सेगमेंट में कुछ आंतरिक प्रयोग किए थे, जिनसे मिले अनुभवों का फायदा इस बार उठाया जाएगा।

कॉम्पिटिशन और मार्केट शेयर

Flipkart ऐसे मार्केट में कदम रख रही है जहाँ फिलहाल Swiggy और Zomato का दबदबा है। दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, Zomato का मार्केट शेयर करीब 57% है, जबकि Swiggy का 43% के आसपास है। ये दोनों कंपनियां शहरी ग्राहकों के बीच काफी मजबूत पकड़ रखती हैं। Flipkart की कोशिश खास तौर पर युवा जेनरेशन (Gen Z) को टारगेट करने की होगी, जो पहले से ही Flipkart के फैशन, ब्यूटी और होम कैटेगरी के साथ-साथ Cleartrip के जरिए ट्रैवल बुकिंग में काफी सक्रिय हैं।

ऑपरेशनल चुनौतियां

इन्वेस्टर्स के लिए यह जानना अहम है कि फूड डिलीवरी सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेंसिव होता है और इसके लिए हाई-फ्रीक्वेंसी लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट की ज़रूरत होती है। टिकाऊ सामान बेचने के विपरीत, फूड डिलीवरी में समय-संवेदनशील और तेज़ लॉजिस्टिक्स की ज़रूरत होती है, जिसमें मार्जिन बहुत कम होता है। इस स्पेस में पहले भी कई कंपनियों को ड्राइवर रिटेंशन, रेस्तरां एक्विजिशन कॉस्ट और प्राइसिंग को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

इसके अलावा, कंपनियां सिर्फ भारी छूट देने के बजाय एक वास्तविक वैल्यू प्रपोजिशन पेश करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी। यह स्थापित प्लेयर्स के खिलाफ एक बड़ी परीक्षा होगी, जो फिलहाल लगातार प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने पर केंद्रित हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी सर्विस की क्वालिटी बनाए रखते हुए क्विक-कॉमर्स या ऑन-डिमांड फूड डिलीवरी मॉडल से जुड़े ऊंचे ऑपरेशनल खर्चों को कैसे मैनेज करती है।

आगे क्या देखें

इन्वेस्टर्स और मार्केट फॉलोअर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट्स में ऑफिशियल लॉन्च डेट, टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क (चाहे वह डेडिकेटेड ऐप हो या ONDC इंटीग्रेशन) और बेंगलुरु में पायलट प्रोग्राम का स्केल शामिल होगा। इसके अलावा, मैनेजमेंट की ओर से इस वेंचर के लिए संभावित कैपिटल खर्च और ग्रुप के ओवरऑल प्रॉफिट मार्जिन पर इसके प्रभाव को लेकर मिलने वाली जानकारी पर नज़र रखना भी ज़रूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.