Walmart के मालिकाना हक वाली Flipkart ने फूड डिलीवरी सेगमेंट में एंट्री की तैयारी कर ली है। कंपनी 'Eat-in by Minutes' नाम से नई सर्विस की टेस्टिंग कर रही है, जिसका मकसद Zomato और Swiggy जैसी दिग्गज कंपनियों को कड़ी टक्कर देना है।
Walmart समर्थित Flipkart भारतीय फूड डिलीवरी मार्केट में हलचल मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने बेंगलुरु में अपने कर्मचारियों के साथ 'Eat-in by Minutes' नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस सर्विस के लिए Flipkart अपने ही लॉजिस्टिक नेटवर्क 'Ekart' का इस्तेमाल कर रही है।
कमीशन मॉडल में बड़ा बदलाव
फिलहाल फूड डिलीवरी मार्केट में Zomato और Swiggy का दबदबा है, जो रेस्टोरेंट्स से 20% से 25% तक का भारी कमीशन वसूलते हैं। Flipkart ने इस चुनौती को समझते हुए एक आक्रामक रणनीति बनाई है। खबर है कि Flipkart रेस्टोरेंट पार्टनर्स से केवल 10% का बेस कमीशन लेगी। कंपनी का लक्ष्य मार्केटिंग और प्रमोशन समेत कुल लागत को ऑर्डर वैल्यू के 15% से 16% के दायरे में रखना है।
राह आसान नहीं, चुनौतियां बरकरार
फूड डिलीवरी के मैदान में उतरना Flipkart के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इससे पहले Amazon, Uber और Google जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सेक्टर में बड़ा मुकाम हासिल करने में असफल रही हैं। Bernstein की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहकों को इस नई सर्विस से प्रति ऑर्डर अधिकतम ₹20 से ₹30 की बचत हो सकती है, जो शायद ग्राहकों को मौजूदा ऐप्स से शिफ्ट करने के लिए काफी न हो। इसके अलावा, Zomato और Swiggy का मजबूत नेटवर्क और ग्राहकों के बीच उनकी गहरी पैठ तोड़ना Flipkart के लिए एक बड़ी मुश्किल होगी।
निवेशकों की नजर में क्या है?
Flipkart की यह सर्विस अक्टूबर के अंत तक पब्लिक के लिए रोलआउट हो सकती है और 2026 के अंत तक इसे 5 से 6 शहरों में विस्तार देने की योजना है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या कंपनी अपनी 'यूनिट इकोनॉमिक्स' को संभाल पाएगी। यदि Flipkart ग्राहकों को जोड़ने के लिए प्राइस वॉर छेड़ती है, तो कंपनी पर कैश बर्न का दबाव बढ़ सकता है, जो उनके फाइनेंशियल परफॉरमेंस को प्रभावित कर सकता है।
