Walmart के स्वामित्व वाली Flipkart Minutes ने अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब ग्रोसरी के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल और ब्यूटी प्रोडक्ट्स की डिलीवरी शुरू कर रही है, ताकि फेस्टिव डिमांड को भुनाया जा सके।
हाई-वैल्यू कैटेगरी पर कंपनी का दांव
क्विक कॉमर्स के बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Flipkart Minutes अब अपनी पहचान ग्रोसरी से आगे ले जाने की तैयारी में है। कंपनी अब स्मार्टफोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे महंगे सामानों की डिलीवरी पर फोकस कर रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य औसत ऑर्डर वैल्यू (AOV) को बढ़ाना और अपने प्रॉफिट मार्जिन में सुधार करना है, क्योंकि ग्रोसरी के मुकाबले इन प्रोडक्ट्स में कमाई की संभावना ज्यादा होती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा विस्तार
अपनी डिलीवरी क्षमता को बढ़ाने के लिए कंपनी तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है। फिलहाल कंपनी के पास 1,200 से ज्यादा माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर हैं, जो 150 से ज्यादा शहरों में फैले हुए हैं। कंपनी ने दिसंबर 2026 तक 1,500 सेंटर्स का नेटवर्क खड़ा करने का लक्ष्य रखा है, ताकि फेस्टिव सीजन के दौरान ग्राहकों को बिना देरी के सामान मिल सके। कंपनी की ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले 4 गुना रही है, जिसके पीछे युवाओं और Gen Z ग्राहकों की बड़ी भूमिका है।
मुकाबला और चुनौतियां
भारतीय क्विक कॉमर्स सेक्टर में Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart के बीच जंग तेज हो गई है। सभी कंपनियां अब इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य नॉन-ग्रोसरी सामानों की ओर रुख कर रही हैं, जिससे मार्केट में डिस्काउंट और मार्केटिंग का खर्च बढ़ सकता है। निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि कंपनी अपने बढ़ते हुए फुलफिलमेंट नेटवर्क के खर्च को कैसे मैनेज करती है और बढ़ती परिचालन चुनौतियों (Operational Risks) से कैसे निपटती है। चूंकि Flipkart, Walmart की सब्सिडियरी है, इसलिए इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर सीधा नहीं है, लेकिन यह Walmart की भारतीय बाजार में पकड़ का बड़ा इंडिकेटर है।
