Flipkart ने अपनी 'Minutes' सर्विस को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी अब **7,000** किसानों और **25** प्रोड्यूसर संगठनों के साथ जुड़ रही है, ताकि ताजे फल और सब्जियों की सप्लाई चेन को बेहतर बनाया जा सके और मुनाफे को बढ़ाया जा सके।
सप्लाई चेन का कायाकल्प
Flipkart अपनी क्विक कॉमर्स सर्विस, 'Flipkart Minutes' के लिए सप्लाई चेन को पूरी तरह से रीकैलिब्रेट कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य खेत से लेकर डिलीवरी तक के समय को 60 से 90 मिनट के भीतर लाना है। इसके लिए उन्होंने 25 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (FPOs) और 7,000 से ज्यादा किसानों को अपने साथ जोड़ा है।
मार्जिन और मुनाफे पर नजर
क्विक कॉमर्स में फल और सब्जियां सबसे ज्यादा बिकने वाली कैटेगरी हैं, लेकिन इनमें बर्बादी (wastage) की गुंजाइश भी बहुत ज्यादा होती है, जिससे मार्जिन पर असर पड़ता है। Flipkart का ध्यान अब कलेक्शन सेंटर्स को खेती वाले इलाकों के करीब लाने पर है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें, तो Flipkart Group का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹1,45,880 करोड़ रहा, जबकि कंपनी का घाटा घटकर ₹8,468 करोड़ हो गया है, जो प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में एक ठोस कदम है।
कड़ी चुनौती और बाजार की स्थिति
भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में कॉम्पिटिशन बहुत गहरा है। सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, Blinkit का मार्केट शेयर सबसे ज्यादा है, जिसके बाद Zepto और Swiggy Instamart आते हैं। Flipkart Minutes फिलहाल मार्केट का 11% हिस्सा कब्जाए हुए है। कंपनी अब एवोकैडो जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर भी जोर दे रही है ताकि आम प्याज-आलू के मुकाबले बेहतर मार्जिन कमाया जा सके।
ऑपरेशनल रिस्क
इतनी बड़ी सप्लाई चेन को मैनेज करना आसान नहीं है। कंपनी के पास अभी 150 शहरों में लगभग 1,200 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर्स हैं। इस हाई-बर्न बिजनेस मॉडल में स्पीड और क्वालिटी के साथ लागत को नियंत्रित करना ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले क्वार्टर्स में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये बदलाव कंपनी के बॉटम लाइन पर सकारात्मक असर डाल पाते हैं या नहीं।
