Flipkart के प्लेटफॉर्म पर एक्टिव सेलर्स की संख्या बढ़कर 14 लाख के स्तर को पार कर गई है। कंपनी ने सालाना आधार पर **62%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जिसके पीछे जीरो-कमीशन पॉलिसी और नए AI टूल्स का बड़ा हाथ है।
ग्रोथ की रफ्तार
Flipkart ने पिछले 15 महीनों में अपनी पहुंच को तेजी से बढ़ाते हुए 14 लाख एक्टिव सेलर्स का आंकड़ा छू लिया है। कंपनी का मुख्य फोकस टियर-II, III और IV शहरों पर है, जहां वह अपनी पैठ गहरी करना चाहती है।
कैसे बदली रणनीति?
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा बदलाव फैशन कैटेगरी में आया है, जहां कंपनी ने जीरो-कमीशन मॉडल लागू किया है। इसके साथ ही, AI आधारित डैशबोर्ड ने विक्रेताओं का काम बेहद आसान बना दिया है। अब सेलर्स को डिमांड ट्रेंड्स और इन्वेंट्री मैनेजमेंट की जानकारी ऑटोमैटिक मिल रही है, जबकि नए सेलर्स के ऑनबोर्डिंग का समय घटकर मात्र 10 से 20 मिनट रह गया है।
फाइनेंशियल सेहत और पैरेंट कंपनी
बता दें कि Flipkart एक प्राइवेट कंपनी है और इसकी 85% हिस्सेदारी Walmart के पास है। इसलिए, इसके शेयर बाजार में लिस्टेड न होने के कारण निवेशकों को Walmart के नतीजों पर नजर रखनी होती है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का रेवेन्यू 14.1% बढ़कर ₹20,807 करोड़ रहा, जबकि घाटा 37% घटकर ₹1,494 करोड़ पर आ गया है।
बाजार में कड़ी टक्कर
हालांकि Flipkart तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ई-कॉमर्स बाजार में Amazon India और Meesho से उसे कड़ी चुनौती मिल रही है। Amazon के पास 20 लाख से ज्यादा सेलर्स हैं। रेगुलेटरी चुनौतियों और GST अनुपालन के बीच, कंपनी के लिए मुनाफा कमाना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। अब बाजार की नजरें अपकमिंग फेस्टिव सीजन पर टिकी हैं। साथ ही, Flipkart का सिंगापुर से भारत में री-डोमिसाइल होना भी भविष्य में संभावित IPO के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
