FirstCry के CEO सुप्रम माहेश्वरी ने क्विक-कॉमर्स सेक्टर में बड़ी उथल-पुथल की आशंका जताई है। लॉजिस्टिक्स की भारी लागत के बीच कंपनी के मार्जिन पर दबाव है और शेयर अपने 52-वीक निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
बाजार में छंटनी की तैयारी
FirstCry के CEO सुप्रम माहेश्वरी ने क्विक-कॉमर्स के भविष्य को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका मानना है कि कई छोटी कंपनियां, जो लॉजिस्टिक्स और कस्टमर एक्विजिशन पर भारी खर्च कर रही हैं, लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगी और अंततः उन्हें बंद होना पड़ेगा या किसी बड़ी कंपनी के साथ विलय (Consolidation) करना होगा।
नई रणनीति और विस्तार
कंपनी पूरी तरह से शून्य से मॉडल खड़ा करने के बजाय अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर रही है। अपनी 'Qwik' सर्विस के जरिए FirstCry अपनी लॉजिस्टिक्स आर्म 'RocketBees' और फिजिकल स्टोर्स के नेटवर्क का तालमेल बिठा रही है। कंपनी इस फाइनेंशियल ईयर में करीब 100 नए स्टोर खोलने की योजना बना रही है ताकि ऐपैरल और स्ट्रॉलर्स जैसे प्रोडक्ट्स की डिलीवरी को और मजबूत किया जा सके।
कमजोर मार्जिन की चुनौती
वित्तीय मोर्चे पर, कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ₹2,106 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 13% अधिक है। हालांकि, नेट लॉस में 34% की कमी आकर यह ₹439.52 करोड़ रहा, लेकिन ऑपरेशनल चुनौतियां बरकरार हैं। कंपनी का ग्रॉस मार्जिन पिछले साल के 38.5% से घटकर 36.5% पर आ गया है। इसके पीछे डायपर कैटेगरी में कड़ी टक्कर और कच्चे माल (Raw Materials) की बढ़ती लागत को प्रमुख कारण बताया गया है।
निवेशकों की चिंता और स्टॉक पर दबाव
इन चुनौतियों के बीच FirstCry (FIRSTCRY) के शेयर लगातार दबाव में हैं और हाल ही में यह अपने 52-वीक निचले स्तर यानी लगभग ₹186 के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी अपने इन-हाउस ब्रांड्स, जिनका ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में 58% से अधिक का योगदान है, के दम पर मार्जिन को वापस पटरी पर ला पाएगी या नहीं।
