त्योहारी सीजन के दौरान एक सर्वे ने Quick-commerce कंपनियों की नींद उड़ा दी है। डेटा के मुताबिक **71%** ग्राहक अब डिलीवरी की रफ्तार के बजाय किफायती कीमत को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकता है।
भारत के क्विक-कॉमर्स सेक्टर के लिए हवा का रुख बदल रहा है। अब तक यह पूरा बिजनेस मॉडल 10-मिनट डिलीवरी के वादे पर टिका था, लेकिन त्योहारी सीजन में ग्राहकों का मिजाज कुछ और ही कह रहा है। एक नई स्टडी के अनुसार, 71% लोग अब डिलीवरी की स्पीड से ज्यादा प्रोडक्ट की कीमत और क्वालिटी को अहमियत दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risk Factors)
Zomato (Blinkit), Zepto और Swiggy Instamart जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। इन कंपनियों का मुख्य मॉडल ही 'स्पीड' पर आधारित था जिसके लिए वे ग्राहकों से प्रीमियम चार्ज करती हैं। अब करीब 60% उपभोक्ता 'हिडन फीस' और 'स्मॉल-कार्ट पेनल्टी' से परेशान हैं।
अगर ये कंपनियां ग्राहकों को बनाए रखने के लिए अपनी फीस कम करती हैं, तो उनके प्रति ऑर्डर मिलने वाले मार्जिन (Contribution Margin) पर भारी दबाव आ सकता है। लॉजिस्टिक्स की लागत पहले ही काफी अधिक है, ऐसे में बैलेंस बनाना मुश्किल होगा।
मार्केट का बदलता चेहरा
सर्वे से यह भी पता चला है कि ग्राहक अब शॉपिंग को बांट रहे हैं। रोजमर्रा के सामान के लिए वे क्विक-कॉमर्स ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन फेस्टिवल से जुड़ी खरीदारी के लिए Amazon जैसी प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जहाँ बेहतर डिस्काउंट्स मिलते हैं।
आने वाली तिमाही के नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपनी फीस स्ट्रक्चर और कस्टमर लॉयल्टी स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव लाती हैं।
