FSSAI ने PepsiCo और Monster Beverage पर भ्रामक लेबलिंग का आरोप लगाया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल मौजूदा स्टॉक बेचने की छूट दी है, लेकिन नए प्रोडक्शन पर 'एनर्जी ड्रिंक' टैग लगाने पर रोक लगा दी है।
विवाद की मुख्य वजह
FSSAI का कहना है कि भारत में 'एनर्जी ड्रिंक' नाम की कोई आधिकारिक कैटेगरी नहीं है, इसलिए इन ड्रिंक्स पर यह लेबल लगाना ग्राहकों को गुमराह करना है। यह विवाद हाई-कैफीन, टॉरिन (taurine) और शुगर वाले ड्रिंक्स को लेकर छिड़ा है, जो युवाओं को टारगेट करते हैं।
कोर्ट से क्या मिला?
दिल्ली हाई कोर्ट ने कंपनियों को थोड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जो स्टॉक पहले से बाजार में है, उसे बेचा जा सकता है। हालांकि, जब तक कानूनी कार्यवाही पूरी नहीं होती, तब तक नई मैन्युफैक्चरिंग में 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Risks)
यह मामला कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है। 31 जुलाई 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, PepsiCo के पास 492 मिलियन बोतलें और 26 मिलियन केन डिस्ट्रीब्यूशन चेन में हैं। अगर कंपनियों को इस स्टॉक को वापस मंगाना पड़ा या री-लेबलिंग करनी पड़ी, तो कंपनी का खर्च काफी बढ़ जाएगा।
मार्केट का भविष्य
भारत का एनर्जी ड्रिंक मार्केट 2028 तक $1.6 बिलियन पहुंचने का अनुमान है, जो 12.6% की रफ्तार से बढ़ रहा है। Red Bull और Reliance Consumer जैसे अन्य खिलाड़ी भी इस घटनाक्रम पर नजर गड़ाए हुए हैं। निवेशकों के लिए अब सबसे जरूरी यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी पैकेजिंग और ब्रांडिंग स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव करती हैं और FSSAI का रुख आगे चलकर बाकी प्रोडक्ट्स पर कितना सख्त होता है।
