FSSAI का बड़ा एक्शन: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अब AI रखेगा नजर, बढ़ेगा कंपनियों का खर्चा

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AuthorMehul Desai|Published at:
FSSAI का बड़ा एक्शन: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अब AI रखेगा नजर, बढ़ेगा कंपनियों का खर्चा

FSSAI अब ऑनलाइन फूड और ग्रोसरी प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के लिए AI-आधारित सिस्टम का परीक्षण कर रही है। डार्क स्टोर्स और क्लाउड किचन्स पर सख्त नियम लागू होने से क्विक-कॉमर्स कंपनियों की राह मुश्किल हो सकती है।

टेक्नोलॉजी के जरिए निगरानी

FSSAI अब फिजिकल इंस्पेक्शन से हटकर टेक्नोलॉजी-ड्रिवन अप्रोच अपना रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से तैयार किए जा रहे इस AI सिस्टम का मुख्य मकसद ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स ऐप्स पर होने वाले सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को ऑटोमेटिक तरीके से पकड़ना है। यह टूल प्रोडक्ट लेबल्स, इंग्रीडिएंट्स और दावों की जांच करेगा, जिससे फिजिकल चेकिंग से पहले ही खामियां सामने आ जाएंगी।

कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव

इस कदम से निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का यह कहना कि वे सिर्फ एक जरिया हैं, अब काम नहीं आएगा। FSSAI ने साफ कर दिया है कि प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स की सीधी जिम्मेदारी खुद प्लेटफॉर्म्स की ही होगी। इससे कंपनियों को अब कैटलॉग ऑडिटिंग, सेलर वेरिफिकेशन और कंप्लायंस टीम पर अपना खर्च (Operational Expenses) बढ़ाना पड़ सकता है।

किन चीजों पर है ज्यादा फोकस?

रेगुलेटर ने डेरी, मीट, पोल्ट्री, मसाले और शहद जैसे हाई-रिस्क कैटेगरीज को अपनी रडार पर रखा है। डार्क स्टोर्स के लिए कोल्ड-चेन स्टैंडर्ड्स और क्लाउड किचन्स के लिए हाइजीन प्रोटोकॉल की सख्त जांच की जाएगी। जो कंपनियां पहले से ही नोटिस या लाइसेंस के विवादों में हैं, उनके लिए यह AI-आधारित स्क्रूटनी और भी कड़ी होगी।

निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि AI की तैनाती कितनी सटीक होती है और क्या इसके कारण कंपनियों को भारी पेनल्टी या स्टॉप-वर्क ऑर्डर्स का सामना करना पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.