भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Switz Foods के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह बड़ा कदम कंपनी के प्रोडक्शन प्लांट में गंभीर हाइजीन (Hygiene) और सैनिटेशन (Sanitation) की खामियों के चलते उठाया गया है।
FSSAI का बड़ा एक्शन: Switz Foods पर गिरी गाज
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Switz Foods Pvt Ltd को तगड़ा झटका दिया है। FSSAI ने कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला कंपनी के प्रोडक्शन फैसिलिटी के इंस्पेक्शन के बाद आया, जिसमें कई गंभीर खामियां पाई गईं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत, FSSAI ने कंपनी को तब तक सभी तरह की फूड बिजनेस एक्टिविटीज रोकने का निर्देश दिया है, जब तक कि सुरक्षा और सैनिटेशन से जुड़ी सभी दिक्कतों को ठीक नहीं कर लिया जाता।
प्रोडक्शन प्लांट में मिलीं गंदगी और लापरवाही की भरमार
इंस्पेक्शन रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के प्लांट में हाइजीन के स्टैंडर्ड्स की बुरी तरह धज्जियां उड़ाई गई हैं। जांच में रेट वॉशिंग एरिया, जनरल वॉशिंग सेक्शन और फूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट की सफाई में बड़ी लापरवाही सामने आई। FSSAI ने पाया कि कैरेट कटिंग मशीन, मोल्ड्स, ट्रॉली और हीटिंग केटल जैसे जरूरी टूल्स की ठीक से सफाई नहीं की जा रही थी। यही नहीं, रिसेप्शन एरिया समेत पूरे प्लांट में जरूरी सैनिटेशन प्रोटोकॉल की कमी साफ दिखी।
कॉन्टैमिनेशन (Contamination) का बड़ा खतरा, Pest Infestation भी?
FSSAI की जांच में ऐसी स्थितियां सामने आईं जिनसे फूड कॉन्टैमिनेशन (Food Contamination) का खतरा बढ़ जाता है। इंस्पेक्टर्स को प्लांट में मक्खियों और मच्छरों जैसे पेस्ट (Pest Infestation) का सबूत मिला। दीवारों और फर्श पर मकड़ी के जाले भी पाए गए। इसके अलावा, टूटे हुए फर्श के टाइल्स और चिकने कोनों जैसी स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम भी नोट की गईं, जहाँ गंदगी जमा हो सकती थी। FSSAI ने कच्चे माल और सेमी-फिनिश्ड फूड आइटम्स को खुला रखने, डस्टबिन के लिए ढक्कन न होने, ड्रेनेज सिस्टम की कमी, और कच्चे व तैयार माल के साथ-साथ शाकाहारी और मांसाहारी उत्पादों को अलग न रखने जैसी गंभीर लापरवाहियों का भी जिक्र किया है।
कारोबार पर तत्काल रोक, कब शुरू होगा प्रोडक्शन?
इस लाइसेंस सस्पेंशन का मतलब है कि Switz Foods फिलहाल किसी भी तरह का प्रोडक्शन नहीं कर सकती। कंपनी को अपना काम दोबारा शुरू करने के लिए FSSAI से री-इंस्पेक्शन (Re-inspection) करवाना होगा और यह साबित करना होगा कि सभी सेफ्टी और सैनिटेशन स्टैंडर्ड्स को पूरा कर लिया गया है। जब तक FSSAI प्लांट को दोबारा खोलने की इजाजत नहीं देता, तब तक कंपनी की कमाई पर असर बना रहेगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनी कब री-इंस्पेक्शन के लिए अप्लाई करती है और क्या नियामक संस्था उनके सुधारात्मक कदमों से संतुष्ट होती है।
