FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसके तहत ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले पैक्ड फूड पर अब लाल रंग के वार्निंग लेबल लगेंगे। इस फैसले का असर एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के शेयरों पर दिख सकता है, जिसकी अगली सुनवाई **10 सितंबर, 2026** को तय है।
नियम और शर्तें
FSSAI ने 28 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अपना एफिडेविट जमा किया है। इस नए नियम के तहत, यदि किसी प्रोडक्ट में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक है, तो पैकेट के सामने लाल रंग का हेक्सागोनल सिंबल (Hexagonal Symbol) लगाना अनिवार्य होगा। यह नियम ICMR-NIN की 2024 की डाइट गाइडलाइंस पर आधारित है।
दो चरणों में होगा लागू
नियामक ने इसे दो फेजों में लागू करने का प्लान बनाया है:
- फेज 1: उन प्रोडक्ट्स पर फोकस होगा जिनमें कम से कम दो न्यूट्रिएंट्स तय सीमा से ज्यादा हैं।
- फेज 2: बाद में उन सभी प्रोडक्ट्स को कवर किया जाएगा जिनमें एक भी न्यूट्रिएंट लिमिट से ऊपर होगा। हालांकि, शहद, घी, गुड़ और एडिबल ऑइल्स को इस दायरे से बाहर रखा गया है।
कंपनियों के लिए चुनौती
इस फैसले से Nestle India, Britannia Industries, ITC, Hindustan Unilever और Tata Consumer Products जैसी बड़ी कंपनियों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इंडस्ट्री का तर्क है कि 100 ग्राम का मानक बहुत सख्त है और यह भारतीय स्नैक्स की असल सर्विंग साइज को नजरअंदाज करता है। निवेशकों के लिए यह बड़ी बात है क्योंकि कंपनियों को अब अपने प्रोडक्ट रिफॉर्मूलेशन, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर मोटा खर्च करना पड़ सकता है।
बाजार की नजरें अब 10 सितंबर, 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इन नियमों का फाइनल रोडमैप क्या होगा और छूट (Exemptions) का दायरा कितना बड़ा होगा।
